नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा बोर्ड (CBSE) छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य विकार के खतरे का मुकाबला करने के लिए नई पॉलिसी लेकर आया है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उस पर कड़े शब्दों को नहीं लिखा जाएगा। दरअसल, मार्कशीट पर टिप्पणी वास्तव में छात्र के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकती है। मानसिक दबाव कई बार बहुत स्पष्ट नहीं हो सकता है, लेकिन यह टिप्पणी प्रमुख परीक्षाओं को लेकर डर पैदा कर सकता हैं, जो छात्रों के भविष्य के लिए हानिकारक है।

यह न केवल छात्रों के मन में एक डर छोड़ देता है, बल्कि छात्र को अवसाद की तरफ भी ले जाता है। कुछ मामलों में छात्रों पर प्रभाव गंभीर नहीं हो सकता है, लेकिन वे पहले से कम उत्साही हो सकते हैं और पढ़ाई में उनकी रुचि भी खत्म हो सकती है। इसका मुकाबला करने के लिए CBSE ने मार्कशीट पर फेल (असफल) और 'कम्पार्टमेंट' जैसे नकारात्मक शब्दों को हटाने की कोशिश कर रही है।

इनकी जगह पर लिखे जाने के लिए स्कूलों को चार वैकल्पिक शब्द भेजने के लिए कहा गया है, जो युवा छात्रों के दिमाग पर प्रतिकूल असर नहीं डालें। सीबीएसई ने यह भी निर्देश दिया है कि स्कूलों को पॉलिसी को अंतिम रूप देने से पहले मार्कशीट में नए शब्दों का उपयोग करना होगा।

जो छात्र दो से अधिक विषयों में असफल होते हैं, उनकी मार्कशीट पर अनुत्तीर्ण लिखा जाता है। वहीं, जो छात्र छात्र दो या दो से कम विषयों में अनुत्तीर्ण होते हैं, उनकी अंकतालिकाओं पर कम्पार्टमेंट लिखा होता है। इससे पहले कक्षा 10 या 12 में सीबीएसई के लिए विशेष आवश्यकता वाले बच्चे इस वर्ष से बुनियादी कैलकुलेटर का उपयोग कर सकेंगे।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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