देश में कोरोना की दूसरी लहर जमकर तबाही मचा रही है। इसके चलते अधिकतर बड़े शहरों में लॉकडाउन लगा हुआ है। 80 फीसदी दुकानें बंद हैं। इस बीच रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 40 लाख नौकरियां जाने की आशंका जाहिर की है। एसोसिएशन ने सरकार और रिजर्व बैंक मदद से मदद की गुहार भी लगाई है।

वित्त मंत्री को लिखी चिट्ठी

रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने वित्तमंत्री को चिट्ठी लिखकर गंभीर हालातों से अवगत कराया। ये हालात राज्यों में लॉकडाउन और कर्फ्यू जैसी परिस्थितियों से पैदा हुए हैं। कारोबारियों ने सभी तरह के कर्ज के ब्याज पर छूट देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि रिटेल कारोबार में मार्जिन कम होता है। कम आमदनी के चलते ब्याज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में सभी कर्ज पर छह फीसदी का ही ब्याज लगाया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को स्कीम भी लानी चाहिए।

तनख्वाह देने के लिए सरकार से मांगा कर्ज

रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मांग है कि रिजर्व बैंक के जरिए कारोबारियों की कार्यशील पूंजी का दायरा बढ़ाते हुए उन्हें विशेष कर्ज दिया जाए। ये कर्ज उनकी सीमा से 30 फीसदी अधिक होना चाहिए। इससे लॉकडाउन और सख्त कर्फ्यू जैसे हालात में कर्मचारियों को तन्ख्वाह दी जा सकेगी। संगठन ने मांग की है कि रिटेल कारोबारियों के लिए इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम दायरा बढ़ाया जाए। वहीं छह महीने तक लिए गए कर्ज के मूलधन और ब्याज पर मोरटोरियम दिया जाना चाहिए।

रिटेल सेक्टर की 30 लाख नौकरियों को खतरा

एसोसिएशन के आंकलन के अनुसार देश के रिटेल क्षेत्र में करीब ढाई लाख करोड़ रुपये का निवेश है। अगर इस दिशा में सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ तुरंत कोई सहायता नहीं की गई तो 75 हजार करोड़ रुपये तक का निवेश एनपीए हो सकता है। यही नहीं इससे सीधे पूरे क्षेत्र में तीस लाख नौकरियां भी खतरे में आ जाएंगी। इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर जुड़े दूसरे क्षेत्रो में भी नौकरियां जानी शुरू हो जाएंगी। इनमें अकेले टेक्सटाइल क्षेत्र की ही 10 लाख नौकरियां शामिल हैं।

Posted By: Arvind Dubey

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