MP Board class 12th Result 2020 : नीमच। मध्‍य प्रदेश माध्‍यमिक शिक्षा मंडल की 12 वीं बोर्ड परीक्षा में नीमच के मुफद्दल अरवीवाला कॉमर्स टॉपर बने हैं। मुफद्दल अरवीवाला ने कॉमर्स में 500 में से 487 अंक प्राप्‍त किए।

नईदुनिया से बातचीत में मुफद्दल अरवीवाला ने कहा मैंने स्कूल में पढ़ाए जाने वाले विषयों पर फोकस रखा। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन तीन घंटे घर पर पढ़ता था। परीक्षा नजदीक आते-आते पढ़ाई का क्रम बढ़ाया। मुझे विश्वास था कि प्रावीण्य सूची में स्थान बन सकता है।

उन्‍होंने कहा कि जैसे ही सूचना मिली कि प्रावीण्य सूची में पहला स्थान है, मेरे परिवार के लिए गर्व की बात है। मेरे पिता सैफुद्दीन भाई शहर में जूते-चप्पल की दुकान लगाते हैं। मां सकीना अरवीवाला गृहिणी हैं। इस सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को देता हूं। स्नातक पढ़ाई के बाद सीए कर समाज की सेवा करुंगा।

उन्‍होंने कहा मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भी मैं इसी तरह सफल होऊंगा। जूनियर विद्यार्थियों ने लिए यही कहना चाहूंगा कि यदि घर पर नियमित दिनचर्या हो और स्कूल में गुरूरुनों का सम्मान कर पढ़ाई पर ध्यान दें तो सफलता निश्चित मिलती है। नंबरों से अधिक महत्वपूर्ण एकाग्रता और याददाश्त मजबूत करना जरूरी है।

प्रदेश में चार विद्यार्थियों ने बनाई जगह, नियमित दिनचर्या को माना सफलता का राज

नीमच जिले में चार विद्यार्थियों ने प्रदेश की प्राविण्य सूची में जगह बनाई। एक छात्रा जहां कला संकाय की है, वहीं तीन विद्यार्थी कॉमर्स संकाय के है। सभी ने अपनी सफलता का श्रेय स्कूल शिक्षक, संस्था प्रमुख और माता-पिता काे दिया। खास बात यह रही कि इन विद्यार्थियों ने अपने जीवन की नियमित दिनचर्या को सबसे अहम माना।

प्रशासनिक सेवा मेरा ध्येय

‘छाेटे से गांव खजूरी में शुरुआती पढ़ाई की। उत्कृष्ट विद्यालय में चयन के बाद गांव छोड़कर नीमच आ गई। होस्टल में रहकर पूरी पढ़ाई की। मुझे विश्वास था कि जिस अंदाज में पढ़ाई की है प्रावीण्य सूची में जगह जरूर बनेगी। मैंने उस भ्रांति को तोड़ दिया होस्टल में लड़कियां पढ़ती नहीं है। भविष्य में स्नातक की पढ़ाई कर प्रशासनिक सेवाओं में जाना मेरा मुख्य ध्येय है। मेरे पिता जयप्रकाश आंत्री ग्राम पंचायत के सचिव है। मेरी माता संगीता पाटीदार गृहिणी है। स्वजनों ने मुझे पढ़ाई में अव्वल रहने के लिए बहुत प्रेरित किया। उनके सहयोग से ही मैंने प्रदेश प्रावीण्य सूची में स्थान बनाया है। मैं अपनी सफलता का श्रेय शिक्षक, प्राचार्य व माता-पिता को देती हूं। कक्षा 10 वीं में भी वे प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई। जुनियर विद्यार्थियों के लिए उनका कहना है कि जो पसंद का विषय है, वहीं लें। मैंने स्वयं विज्ञान में रूचि नहीं होने से कला संकाय को चुना। - निकिता पाटीदार, ऑर्ट संकाय में प्रदेश में तृतीय

आत्मविश्वास से पाई सफलता

‘जीवन में महसूस किया कि माता-पिता का आशीर्वाद और शिक्षकों का मार्गदर्शन कभी खाली नहीं जाता। नियमित पढ़ाई की। आत्मविश्वास से यह सफलता अर्जित की है। स्नातक के बाद सीए या प्रशासनिक सेवा जैसे उच्च पद पर पहुंचकर ही समाज की सेवा करने का मन है। मेरे पिता लोकेंद्र जैन की स्टेशनरी की दुकान है और मां सुनीता गृहिणी है। मैं नियमित चार से छह घंटे पढ़ाई करता था। किसी भी पाठ्यक्रम को ध्यान से पढ़कर उसकी पुनरावृत्ति जरूरी है। नियमित दिनचर्या के साथ स्वास्थ्य पर भी पूरा ध्यान रखा। जूनियर विद्यार्थियों को यही कहना है कि शिक्षकों द्वारा पढ़ाया गया पाठ्यक्रम नियमित पढ़ा जाए। जिससे परीक्षा के दिनों में एक साथ दबाव नहीं बनेगा। अपनी रूचि अनुसार ही विषय और दिशा चुनना चाहिए। कॉमर्स लेकर मैंने मेहनत की और सफलता मिली। पढ़ाई के अलावा में भी जिसमें रूचि हो, उसे हॉबी बनाना चाहिए। - शुभम जैन, कॉमर्स में प्रदेश में नौवां स्थान

सीए बनना प्रथम लक्ष्य

‘मुझे अच्छे नंबरों की उम्मीद थी। जैसे ही सूचना मिली कि प्रावीण्य सूची में स्थान मिला है, मैं वैसे ही दोड़कर अपने मित्र मुफद्दल के घर आया और प्रदेश टॉप करने पर उसे बधाई दी। मैं भविष्य में स्नातक कर सीए बनना चाहता हूं। मेरे पिता सैफूद्दीन हवेलीवाला हार्डवेयर व्यवसायी है। जबकि मां फातेमा गृहिणी है। नियमित छह घंटे पढ़ाई की। स्कूल में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम का एकाग्रता से समझा। महसूस किया कि नियमित पढ़ाई से परीक्षा के दिनों में बाेझ महसूस नहीं होता है। मेरी इस सफलता का श्रेय शिक्षकों और माता-पिता काे जाता है। जूनियर विद्यार्थियों ाको कहना चाहूंगा कि वे लक्ष्य बनाकर नियमित पढ़े और अपने स्वयं नोट्स बनाए। इससे पढ़ाई में आत्मविश्वास बढ़ेगा। प्रावीण्य सूची में शामिल होने के लिए अनुशासन में रहना जरूरी है। यदि लक्ष्य निर्धारित कर लिया जाए तो मेहनत के साथ सफलता जरूर मिलती है। -बुरहानुद्दीन हवेलीवाला, कॉमर्स में प्रदेश में 10 वां स्थान

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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