घटना चाहे छोटी हो या बड़ी, हममें से ज्यादातर लोगों को प्रतिक्रिया स्वरूप क्रोध आता है। हालांकि कई बार ऐसी

परिस्थितियां जन्म ले लेती हैं, जिसमें अपने गुस्से को नियंत्रित कर पाना आसान काम नहीं होता है। क्या आप जानते हैं कि कई बार क्रोध की वजह से बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं? इसलिए क्रोध को बाहर निकालने से पहले एक बार जरूर सोचें। क्रोध प्रकट करने के बजाय कई दूसरे तरीके भी हैं, जिनसे आप दूसरों को अपनी भावनाओं से

अवगत करा सकते हैं। यदि आप ऐसा करने में सफल हो जाते हैं, तब आप आसानी से अपने क्रोध पर काबू पा सकते हैं।

क्या होते हैं क्रोध आने के कारण

ज्यादातर लोग चाहते हैं कि सामने वाला व्यक्ति उसकी भावनाओं को नहीं समझता या उसकी बातों पर ध्यान नहीं देता, तब उसके पास केवल एक ही रास्ता बचता है कि वह या तो ऊंची आवाज में बात करे या फिर क्रोधित हो। जब गुस्सा करने या चिल्लाने पर भी उसकी जरूरत पूरी नहीं हो पाती, तब वह हिंसा का सहारा लेता है। जब कोई

व्यक्ति क्रोधित होने पर हिंसा का सहारा लेता है, तब एनवीसी यानी नॉन वायलेंस कम्युनिकेशन की भूमिका शुरू होती है।

जब आपके दोस्त किसी बात को सुनी-अनसुनी कर देते हैं या आप ट्रैफिक में फंसे होते हैं, तो आपको क्रोध आता है। यदि आपको जीवन के किसी क्षेत्र में असफलता हासिल होती है, तो आप निश्चित रूप से स्वयं पर क्रोध करते हैं।

क्रोध न सिर्फ शारीरिक हानि होती है बल्कि सामाजिक और आर्थिक हानि भी उठाना पड़ती है।

आइए समझते हैं कैसे मैनेज करें क्रोध को:

नॉन वायलेंस कम्युनिकेशन

नॉन वायलेंस कम्युनिकेशन इस बात पर जोर देता है कि यदि आप किसी बात पर क्रोधित होते हैं, तो सामने वाले व्यक्ति की भावनाएं और उसकी मन:स्थिति को भी समझने की कोशिश करें। ऐसा करके आप दूसरों की भावनाओं और इच्छाओं को भी समझ पाएंगे। हालांकि यह सुनने में आसान लगता है, लेकिन जब आप इसे प्रैक्टिस में लाते हैं, तो आप को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, ज्यादातर लोग दूसरों से अधिक अपने बारे में सोचते हैं। जब भी आप किसी व्यक्ति से दिल का संपर्क टूट जाता है। आप पूरी तरह अपने दिमाग पर निर्भर हो जाते हैं। इसके बाद आप यह सोचते लगते हैं कि गलती कहां हुई थी? किसकी कितनी गलती है? आप ये सोचकर दुखी होने लगते हैं और आपका यही दुख क्रोध के रूप में सामने आने लगता है। इसके बाद आप न केवल तेज आवाज में बोलने लगते हैं, बल्कि हिंसा करने पर भी उतारू हो जाते हैं।

क्रोध से चिल्लाने की वजह

जब दो लोग आपस में एक दूसरे पर क्रोधित होते हैं, तब उनके दिलों के बीच का संपर्क टूट जाता है। उस समय वे एक दूसरे की भावनाओं, सम्मान का ख्याल रखना बिल्कुल भूल जाते हैं। इस दौरान, आप जितना ज्यादा गुस्सा करते हैं, आपकी आवाज उतनी ज्यादा ऊंची होती जाती है। कभी आपने इस बात पर गौर किया है कि जब दो लोग एक-दूसरे से बहुत अधिक प्यार करते हैं, तब क्या होता है? ऐसी परिस्थिति में बिना कुछ कहे ही आप अपनी भावनाओं को दूसरे के सामने रख देते हैं। ऐसे समय में दिल एक-दूसरे के बहुत करीब होता है और उनमें एक जैसी प्रेम-भावना होती है। यदि आप चाहते हैं कि लोग आपसे प्यार करें, तो क्रोध के बजाए आप भी दूसरों को प्यार करना सीखें।

कैसे समाप्त हो क्रोध?

हमारी कई भावनाओं में एक है क्रोध। क्रोध एक कठोर भावना है। आपने क्या देखा, सुना, सोचा या आपके मन में कैसी भावना ने जन्म लिया, आदि सभी बातों पर ही क्रोध का आना निर्भर होता है। उदाहरण के तौर पर जब भी आप क्रोधित होते हैं, तब अक्सर सामने वाले व्यक्ति के बारे में अपने-आप से ये बातें कहते हैं।

यही तो कहतें हैं आपने आप से

1. मैनें अपने पूरे जीवन में ऐसा गैर-जिम्मेदार व्यक्ति नहीं देखा।

2. यह इतना घमंडी है कि कभी किसी की बात सुनता ही नहीं है।

3. इससे बात करने का कोई फायदा नहीं है, क्यों कि यह कभी-भी बदल नहीं सकता।

4. यह बहुत आलसी है, कभी भी किसी काम को हाथ तक नहीं लगाता।

5. मेरे माता-पिता मुझे कभी समझ नहीं पाते हैं। असल में ये दो पीढ़ियों के सोच में आए फर्क की वजह है।

ऊपर दिए गए सभी वाक्यों से यह पता चलता है कि आप सामने वाले व्यक्ति का मूल्यांकन कर अपना निर्णय ले रहे हैं। यह एक ऐसा दुष्चक्र है, जो चलता ही रहता है। आप जितना इसके बारे में सोचते हैं उतना ही क्रोध आपके अंदर जन्म लेने लगता है।

कैसे काबू पाएं क्रोध पर

अब सवाल यह उठता है कि क्रोध से बचने का उपाए क्या है? इसका सीधा उपाए यह है कि दूसरे पर आरोप लगाने

या उस व्यक्ति के बारे में निर्णय लेने से पहले एक गहरी लंबी सांस लें। आप दिल से यह बात सोचें कि सामने वाले व्यक्ति के प्रति आपकी भावना कैसी है और उस पर क्रोध करने की क्या जरूरत है? इस विषय पर सोचने के लिए स्वयं को पूरा समय दें। संभव है कि इस लड़ाई की वजह आप ही हों।

कभी भी बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति की मीनमेख न निकालें। जहां तक संभव हो बात बढ़ने पर मौन रहने

का प्रयत्न करें। जब एक बार आप अपनी मन:स्थिति को समझ पाने में कामयाब हो जाते हैं, तो पाएंगे कि कमाल

का जादू हुआ है। आपके अंदर क्रोध की आग भी शांत हो रही है। आप खुद को शांत और हल्का अनुभव करेंगे। जब आप शांत होंगे, तब अच्छे ढंग से सोच भी पाते हैं। इसके बाद आप अपनी बात को दूसरों को समझा पाने में कामयाब हो पाते हैं। एक तरीका यह भी है कि जब आपको सामने वाले की बात पर क्रोध आए, तो मन ही मन गिनती करना शुरू कर दें।

कैसे प्रस्तुत करें अपनी बात

1. सबसे पहले यह अवलोकन करें कि आप बिना समझे-बूझे सामने वाले व्यक्ति पर आरोप तो नहीं लगा रहे हैं। आप बहस के दौरान वही बातें कहें, जिसे आपने देखा या सुना है। उस बात के बारे में एक बार जरूर सोचें, जिसकी वजह से आपका गुस्सा बढ़ा है।

2. अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त करना सीखें।

3. आधी-अधूरी या कही-सुनी बातों पर प्रतिक्रिया व्यक्त न करें।

4. एक ठोस कदम उठाएं, जिसकी मदद से आप अपनी बात को सामने वाले व्यक्ति को समझा पाने में सफल हो पाएं।

किसी भी परिस्थितियों में आपके सामने दो विकल्प मौजूद होते हैं। आप या तो सामने वाले व्यक्तिकी बात को समझने का प्रयास करें या फिर उनकी बात से पूरी तरह अलग हो जाएं। आपको कौन-सा कदम उठाना

है, इसका अंतिम निर्णय आपको ही लेना है।

- डॉ. गौरव गुप्ता, मनोचिकित्सक, नई दिल्ली