किसी भी बीमारी में इलाज के लिए दवाइयों के साथ ही भिन्न थैरेपीज भी अपनाई जाती हैं। कई मामलों में तो इन थैरेपीज का असर दवाइयों से भी आगे तक होता है और बहुत अच्छे परिणाम मिलते हैं। उदाहरण के लिए सेरेब्रल पाल्सी के मरीजों में फिजियोथैरेपी से होने वाला फायदा। जानिए विशेषज्ञ से इसके बारे में।

क्या है समस्या?

सेरेब्रल पाल्सी असल में न्यूरोलॉजिकल स्थितियों का एक समूह है, जो व्यक्ति में मोटर स्किल्स, शरीर के संचालन और मांसपेशियों को प्रभावित करता है। इस स्थिति की वजह से देखने, सुनने और सीखने की क्षमता में बाधा आने लगती है। सेरेब्रल पाल्सी की स्थिति हर 1000 बच्चों से 2-3 बच्चों को प्रभावित कर सकती है। इसके होने के पीछे का मुख्य कारण है जन्म के पहले या जन्म के दौरान नवजात या भ्रूण के दिमाग को या फिर 5 वर्ष की उम्र के पहले बच्चे के दिमाग को किसी कारण से पहुंचने वाली क्षति। यह क्षति संक्रमण के कारण भी हो सकती है या फिर

मां के स्वास्थ्य का अच्छा न होना,जेनेटिक डिसॉर्डर, म्यूटेशन, स्ट्रोक, डिलीवरी का सही तरीके से न हो पाना, आदि भी इसके पीछे हो सकते हैं। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे यानी प्रीमैच्योर बेबीज, जिनका वजन 3.3 पौंड से भी कम होता है, उनमें इस स्थिति की आशंका बढ़ सकती है। इसके अलावा नवजात अवस्था में दिमाग पर लगी

कोई चोट, लैड पॉइजनिंग, बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस या दिमाग को ठीक से खून न मिलने पर भी यह अवस्था सामने आ सकती है। इस स्थिति के कई प्रकार हो सकते हैं और उनके हिसाब से ही इसके इलाज की रूपरेखा तय की जाती है।

फिजियोथैरेपी का महत्व

सेरेब्रल पाल्सी एक ऐसी स्थिति है जो वक्त के साथ बढ़ती नहीं है। यह इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। मतलब पहली बार में दिमाग को जो क्षति पहुंचती है उसके आगे नहीं बढ़ती, लेकिन उसकी वजह से हुए नुकसान को आगे नियंत्रित करना होता है। इस स्थिति में फिजियोथैरेपी बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस स्थिति में मुख्यतौर पर मोटर स्किल्स को दुरुस्त करने, मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाने और बैलेंस बरकरार रखने के लिए फिजियोथैरेपी की जाती है। इसका लक्ष्य होता है बच्चे को चीजें पकड़ने, चलने-फिरने,बैठने-उठने आदि तथा शारीरिक संतुलन बनाने में मदद करना। इसके लिए सबसे पहले स्ट्रेचिंग जैसी तकनीकों से मांसपेशियों को लचीला बनाने का काम किया जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे एक्सरसाइज के तरीकों को आगे बढ़ाया जाता है।

जल्द डायग्नोज ज्यादा फायदा

सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चों में जितनी जल्दी स्थिति पता चलती है उतनी ही जल्दी फिजियोथैरेपी शुरू करने से फायदा बढ़ता जाता है। उदाहरण के लिए अभी हमारे पास एक 7 माह का सीपी (सेरेब्रल पाल्सी) बच्चा आ रहा है। इस उम्र में मांसपेशियों को बड़ी आसानी से सही रूप में ढाला जा सकता है। इस बच्चे को क्रॉलिंग करवाने, हाथों का

संचालन करवाने, शरीर को मोड़कर घोड़ा बनाने या रंग-बिरंगे खिलौने, पेन आदि पकड़ा कर उनकी मोटर

स्किल का विकास करवाने जैसी एक्सरसाइज करवाई जाती हैं। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है मांसपेशियों पर उतनी ही

मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है। यह हमेशा ध्यान रखें कि जल्दी थैरेपी शुरू करने से जितनी पावर शुरुआत से बच्चे के पास होती है उतनी ही प्रतिशत रिकवरी हो सकती है।

अन्य थैरेपीज की मदद

सीपी बच्चों के लिए फिजियोथैरपी के साथ ही स्पीच थैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी तथा बच्चों के डॉक्टर की सलाह का सही संतुलन होना जरूरी है। बच्चों के डॉक्टर यानी पीडियाट्रिशियन इस समस्या को पहचान कर इलाज की रूपरेखा तय करते हैं फिर फिजियोथैरेपिस्ट जहां शरीर को सुदृढ़ बनाने का काम करते हैं, स्पीच थैरेपिस्ट

बोली को सुधारते हैं तथा ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट रोजमर्रा के काम और कुछ रोजगार लायक काम करना सिखाते हैं। कुछ मामलों में मांसपेशियों को सर्जरी द्वारा भी लम्बा करने की आवश्यकता हो सकती है। यहां एक और बात जो महत्वपूर्ण है वह यह कि बच्चे या बड़े जो भी इस स्थिति से गुजर रहे हैं उनके परिजनों को घर पर भी डॉक्टर द्वारा बताई गई एक्सरसाइज करवाते रहनी चाहिए। इससे फायदा बढ़ जाता है।

- डॉ. आवुला प्रसाद, फिजियोथिरेपिस्ट, भिलाई, छत्तीसगढ़

Posted By: Sonal Sharma