Cervical Cancer: सारी दुनिया में स्तन कैंसर के रोगियों के बाद दूसरे स्थान पर है सर्वाइकल कैंसर। व्यक्तिगत साफ सफाई के अभाव में देश की महिलाएं इस घातक रोग की शिकार हो जाती हैं। इस रोग से बचने के लिए जागरूकता और टॉयलेट की स्वच्छता बेहद जरूरी मानी गई है।

हमारे देश में स्तन कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर से मरने वाली औरतों की संख्या भी कम नहीं है। सारी दुनिया में

सर्वाइकल कैंसर से मरने वालों की एक चौथाई महिलाएं हमारे देश की होती हैं। यह कैंसर जननांगों से संबंधित होता है। महिलाओं को इस कैंसर के बारे में जब पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

क्या है सर्वाइकल कैंसर

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से में जहां सर्विक्स होता है वहीं पर फैलता है। इसे 'दि नेक ऑफ वुम्ब' यानी यूट्रस की गर्दन भी कहते हैं। सर्विक्स योनि के ऊपरी हिस्से तक फैला हुआ शरीर का हिस्सा होता

है। यहीं पर होने वाले कैंसर को सर्वाइकल कैंसर कहा जाता है।

क्या है इसके लक्षण

सर्वाइकल कैंसर का पता सामान्य तौर पर योनि से होने वाली ब्लीडिंग से चलता है। वास्तव में, सर्वाइकल कैंसर एक दिन में नहीं होता है। सामान्य तौर पर एचपीवी इंफेक्शन, यानी ह्यूमन पैपीलोमा वायरस के कारण शरीर में सेल्स असामान्य हो जाते हैं। विभिन्न स्तरों से गुजर कर ये सेल्स बाद में कैंसर सेल्स में परिवर्तित हो जाते हैं। शुरूआती स्टेज में असामान्य सेल्स कैंसर सेल्स नहीं होते हैं और न ही ये किसी बीमारी के लक्षण के बारे में ही बयान करते हैं।

कैसे हो सकता है बचाव

1. सेक्सुअल पार्टनर की संख्या कम हो

2. धूम्रपान न किया जाए

3. सही उम्र में मां बनें

4. बच्चों की संख्या अधिक न हों।

इलाज के विकल्प

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के कुछ विकल्प भारत में उपलब्ध हैं-जैसे रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी। इलाज का कौन-सा विकल्प रोगी के लिए उपयुक्त हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस स्टेज तक पहुंच चुका है।


कब कराएं पेप स्मियर टेस्ट

पेप स्मियर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है।सभी सेक्सुअली एक्टिव महिलाएं जिनकी उम्र 24 से 64 साल के बीच में है, उन्हें पेप स्मियर टेस्ट नियमित रूप से एक निश्चित अंतराल के बाद कराते रहना चाहिए। 24 से 50 साल की महिलाओं को यह टेस्ट हर तीन साल के अंतराल के बाद कराना चाहिए, जब कि 50 से 64 साल की महिलाओं को हर पांच साल में इसे कराना चाहिए।

ऐसा कई बार सुनने में आता है कि सर्वाइकल कैंसर के कारण गर्भ धारण करना कठिन हो जाता है। सर्वाइकल कैंसर फर्टिलिटी को प्रभावित नहीं करता है। इस समस्या से ग्रस्त महिला ने रेडियोथेरेपी कराई हो तो संभव है कि रेडियोथेरेपी के कारण गर्भ धारण करना मुश्किल हो जाए। यदि महिला को इलाज के दौरान अपना गर्भाशय ही निकलावाना पड़े तब तो गर्भधारण करना नामुमकिन हो जाता है।

क्या दोबारा हो सकता कैंसर?

सर्वाइकल कैंसर भी अन्य कैंसर की ही तरह दो बारा भी हो सकता है। भारतीय महिलाएं अक्सर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाते-निभाते अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को अनदेखा कर देती हैं। यदि आप सर्वाइकल कैंसर की समस्या को दूर रखना चाहती हैं, तो जागरूक बनें। यदि इस समस्या का पता शुरूआती दौर में ही लग जाए, तो आप आसानी से इस समस्या पर काबू पा सकती हैं। इस लिए आप अपना नियमित मेडिकल चेकअप कराएं। याद रखें कि आपका स्वास्थ्य आपके हाथ में है।

- डॉ. कनिका गुप्ता, एसोसिएट डायरेक्टर, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल