Chronic hepatitis B: पीलिया एक ऐसा घातक रोग है जिसके लक्षण एकाएक प्रकट नहीं होते। धीरे-धीरे करके यह बीमारी शरीर को खोखला कर डालती है। लिवर की यह बीमारी जानलेवा होती है। इसलिए थकान और फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। लापरवाही न करें और पूरा इलाज कराएं।


बार-बार थकान महसूस हो रही हो या फ्लू जैसे बुखार के लक्षण उभर आते हों। अगर मितली आती हो और पीलिया हो जाता हो तो जांचें कराएं। यह हिपेटाइटिस बी के संक्रमण के लक्षण भी हो सकते हैं। ये लक्षण ऐसे हैं जो किसी भी दूसरी बीमारी में भी सामने आते हैं। मरीज को पता ही नहीं चलता है कि उसे हिपेटाइटिस बी जैसी घातक बीमारी हुई है। इधर लिवर सेल्स पर वायरस का आक्रमण जारी रहता है। दूसरी जांच में चलता है पता अक्सर ऐसा होता है कि किसी दूसरी बीमारी के लिए खून की जांचें होती हैं तब इस वायरस का पता चलता है। जैसे-जैसे लिवर में यह वायरस घर करता जाता है वैसे-वैसे मरीज में पीलिया के लक्षण तेजी से उभरते हैं। इसके साथ मरीज के पैरों, नाभिप्रदेश में तरल पदार्थों का जमाव होने लगता है। खून की उल्टियां होने लगती हैं तथा मल का रंग काला हो जाता है।

कैसे फैलता है संक्रमण

इसका हिपेटाइटिस बी के वायरस का संक्रमण रक्त और शरीर के अन्य तरह पदार्थों के द्वारा फैलता है। संक्रमित बच्चों को इंजेक्शन लगाने के बाद उसी सुई से दूसरे बच्चों को इंजेक्शन लगाने के कारण यह वायरस दूसरे बच्चों तक फैल जाता है। एक बार यह वायरस जब रक्त में घुल जाता है तब यह लिवर में प्रवेश कर जाता है और वहां अपने जैसे दूसरे वायरस पैदा करने लगता है। बच्चों की अपेक्षा वयस्कों में हिपेटाइटिस- बी के लक्षण अधिक तेजी से सामने आते हैं। संक्रमित वयस्कों में भी 40 प्रतिशत मामलों में कोई चिन्ह अथवा लक्षण सामने नहीं दिखाई देते और जिनके लक्षण उभरते हैं वे इतने अस्पष्ट होते हैं जो हिपेटाइटिस बी या डी के संक्रमण की पुष्टि नहीं करते। इनमें बुखार, भूख की कमी, थकान, वमन की इच्छा होना, मांसपेशियों में दर्द तथा पीलिया आदि प्रमुख हैं।

बी, सी और डी हैं खतरनाक वायरस

इन तीनों तरह के वायरसों से लिवर के क्षतिग्रस्त होने का जोखिम होता है जो सिरोसिस ऑफ लिवर में तब्दील होजाता है। इससे लिवर का कैंसर या इससे जुड़ी बीमारियां हो जाती हैं। एक सर्वेक्षण के मुताबिक देश में इस समय लगभग 4 करोड़ लोग वर्षों से इस बीमारी की चपेट में हैं। यह वायरस एड्‌स के वायरस के मुकाबले 100 गुना अधिक संक्रामक है।

कई कारणों से हो सकती है यह बीमारी

हिपेटाइसिस लिवर की ऐसी बीमारी है जो कई कारणों से हो सकती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कारण है शराबखोरी और वायरस का संक्रमण। हिपेटाइसिस होने के लिए 5 तरह के वायरस जिम्मेदार होते हैं। इन्हें ए, बी, सी, डी और ई के नाम से जाना जाता है। इनमें से ए श्रेणी के वायरस का हमला छोटे बच्चों पर होता है जो जल्दी ठीक भी हो जाता है। हिपेटाइटिस ई का वायरस वयस्कों पर हमला करता है जो 95 प्रतिशत मामलों में ठीक भी हो जाता है। हमारे देश में इन दोनों तरह के वायरसों का संक्रमण गंदगी और व्यक्तिगत साफ-सफाई के अभाव में होता है। पीने का पानी शुद्ध रखने से इन दोनों वायरस के हमले से बचा जा सकता ह

क्या हैं रक्षा के उपाय

जिन्हें अब तक हिपेटाइटिस बी का संक्रमण नहीं हुआ है वे रक्षा की प्रथम पंक्ति के तौर पर टीका लगवा सकते हैं। जो संक्रमित हो चुके हैं उन्हें क्रॉनिक हिपेटाइटिस बी से लड़ने के लिए दवाओं का सहारा है। दवाएं केवल संक्रमण को लिवर तक सीमित रखने के ही काम आती है।

- डॉ.अजय जैन, पेटरोग विशेषज्ञ, चोइथराम अस्पताल, इंदौर