डायबिटीज अपने साथ अनेक गंभीर समस्याएं लेकर आता है। इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्योंकि इसका हमला पता ही नहीं चलता है कि कब हो गया। डायबिटीज के रोगियों को लकवा लगने की आशंका दूसरों के मुकाबले अधिक होती है।

अक्सर आपने लोगों को बातचीत करते अवश्य सुना होगा कि अमुक व्यक्ति के पिता को या बड़े भाई को 'स्ट्रोक' हो गया था और बिस्तर पर तब से पड़े हैं। उनको डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर पहले से ही था। इसके बावजूद वे चलते-फिरते थे और रोज सुबह पार्क में सैर करने भी जाते थे। अब जब से उन्हें स्ट्रोक हुआ तब से उनका टहलना बिल्कुल बंद हो गया और अपने आप बगैर मदद के वे बाथरूम तक भी नहीं जा पाते।

आखिर यह 'स्ट्रोक' है क्या?

स्ट्रोक का सीधा साधारण भाषा में मतलब अचानक आई बेहोशी या फालिज या दोनों के एक साथ अटैक से होता है। बेहोशी तो ठीक हो गई पर फालिज का हाथ या पैर असर बना रहता है। पहले यह स्ट्रोक का कहर ज्यादातर वृद्ध लोगों पर बरसता था पर अब डायबिटीज के बढ़ते प्रकोप ने कम उम्र में ही लोगों को स्ट्रोक के कगार पर खड़ा कर दिया है।

TIA क्या है?

'ट्रान्सियन्ट इस्किमिक अटैक' यानी TIA का मतलब मिनी स्ट्रोक यानी छोटा स्ट्रोक है। टीआईए में क्षणिक बेहोशी व कमजोरी आती है पर यह 24 घंटे से ज्यादा नहीं रुकती और टीआईए का मरीज फिर से बाहरी तौर पहले की तरह नार्मल हो जाता है। टीआईए से ग्रस्त मरीजों में एक तिहाई मरीज पांच साल के अंदर ही बड़े यानी वास्तविक जानलेवा स्ट्रोक के शिकार हो जाते हैं। इसलिए टीआईए से पीड़ित मरीज को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श करते रहना चाहिए। इस मिनी दौरे का का एक बहुत बड़ा कारण मस्तिष्क को शुद्ध रक्त ले जाने वाली नस जोकि गर्दन में होती है उसमें रुकावट आना जाना है। टीआईए के मरीजों को गर्दन स्थित खून की नलियों को ठीक करने के लिए किसी वैस्क्युलर या कार्डियो वैस्क्युलर सर्जन की मदद लेनी चाहिए।

शुगर के कौन से मरीज हैं जोखिम पर

1. बढ़ती उम्र यानी वृद्ध लोग

2. टीआईए के मरीज

3. ब्लड प्रेशर के मरीज

अगर मधुमेह से ग्रस्त एक वृद्ध मरीज को ब्लड प्रेशर या हार्ट अटैक की शिकायत रहती है तो यकीन मानिए उसे देर सवेर टीआईए या फिर 'स्ट्रोक" का अटैक होना निश्चित है इसलिए ऐसे मरीजों को सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा मोटापे से ग्रस्त धूम्रपान के शौकीन मधुमेह के मरीज स्ट्रोक के बहुत जल्दी शिकार बनते हैं।

स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण

यह तो सर्वविदित है कि डायबिटीज के मरीजों में कैरोटिड नली में वसा जमा होने की प्रक्रिया जारी रहने की वजह से

शुद्ध खून के बहाव में गतिरोध पैदा हो जाता है। पर इस गतिरोध के अलावा कभी-कभी खून की नलियों की सूजन की बीमारी भी खून के प्रवाह को अवरुद्ध कर देती है। इससे गर्दन की नली के साथ-साथ शरीर की और भी खून की नलियां प्रभावित हो जाती हैं।

डायबिटीज के मरीज क्या करें?

अगर डायबिटीज के मरीज कभी भी हल्का-सा चक्कर या कमजोरी आने की शिकायत करें तो तुरंत किसी वैस्क्युलर या कार्डियो वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श लें। सबसे पहले अपनी गर्दन में स्थित कैरोटिड नली की जांच करवाएं। उसकी बीमारी व उसमें बह रहे खून का सही निर्धारण करवाएं अन्यथा स्ट्रोक के आक्रमण से बचना मुश्किल हो जाएगा।

- डॉ. के.के.पांडेय, कार्डियेक थोरोसिक सर्जन, अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली

Posted By: Sonal Sharma

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