चारों तरफ से आपको आज ढेर सारे गैजेट्‌स ने घेर रखा है। हाथ में पहनी घड़ी से लेकर कम्प्यूटर, मोबाइल, स्मार्ट होम, स्मार्ट अप्लायंसेस आदि। इस अति निर्भरता ने सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है दिमाग की प्राकृतिक क्षमता को। जाहिर है कि तकनीक के युग में इन साधनों से पूरी तरह दूर रहना मुश्किल है, इसलिए दिमाग के फायदे के लिए जरूरी है डिजिटल डिटॉक्स।

याद कीजिए कि पिछले करीब 10-15 सालों में आपकी एकाग्रता, याददाश्त और व्यवहार में क्या परिवर्तन आए हैं। क्या आप अब भी दिमाग में जरूरी फोन नंबर याद रख पाते हैं? या लोगों के नाम आपको उतनी सहजता से याद रहते हैं? क्या आप बात-बे बात अचानक चिड़चिड़ाने लगे हैं? या आपको छोटी-छोटी बात पर भी गुस्सा आ जाता है? यह तमाम वे स्थितियां हैं जो ध्यान न देने पर गंभीर हो सकती हैं और आगे किसी बीमारी का रूप ले सकती हैं। खास बात यह है कि यह तमाम स्थितियां उम्र के पहले यानी युवावस्था में लोगों में दिखाई देने लगी हैं।

इस तरह करें डिटॉक्स

- कोशिश करें इस अतिनिर्भरता को खत्म करने की, ताकि आप स्वस्थ जीवन जी सकें। कुछ इस तरह सबसे पहले अपने सोने और जागने का एक समय निश्चित करें।

- रात को सोने के समय के करीब 30-40 मिनिट्‌स पहले मोबाइल, लैपटॉप, टीवी आदि जैसे तमाम साधन बंद करे दें।

- हिंसक वीडियो गेम्स या ऑनलाइन वीडियो से खासतौर पर बच्चों को दूर रखें। इसके लिए दो महत्वपूर्ण बातों

पर ध्यान दें, पहली- बच्चों को किसी फिजिकल एक्टिविटी से जोड़ें या किसी एक खेल से। रोज कम से कम आधा

घंटा ऐसे खेलों को दें।

- हफ्ते में कोई एक दिन तय करें। इस दिन 2-3 घंटे टीवी, कम्प्यूटर, मोबाइल सबसे दूरी बनाएं और परिवार के साथ समय बिताएं।

- भरपूर नींद लें।

- खाते समय किसी भी तरह की स्क्रीन को देखने से बचें।

- डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, कंसल्टेंट सायकायट्रिस्ट, भोपाल

Posted By: Sonal Sharma