यूं भी स्वस्थ खाने का असर पूरे स्वास्थ्य पर होता है। खासतौर पर किसी बीमारी या विशेष स्थिति के हिसाब से भोजन में कई बार परहेज की सलाह भी दी जाती है। वहीं कुछ विशेष खाद्य सकारात्मक असर भी डाल सकते हैं। जानिए ऐसे ही कुछ खाद्य अस्थमा के संदर्भ में।

फलऔर सब्जियों का असर ताजे फल और सब्जियां किसी भी व्यक्ति के लिए पोषक और स्वास्थ्यवर्धक हो सकते हैं। लेकिन किसी विशेष शारीरिक स्थिति से गुजर रहे व्यक्ति के लिए इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। फलों और सब्जियों में बीटा केरोटीन तथा विटामिन ई एवं सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट्‌स भरपूर मात्रा में होते हैं। ये फेफड़ों की कोशिकाओं को क्षति पहुंचाने वाले तथा फेफड़ों में सूजन पैदा करने वाले फ्री रेडिकल्स को रोकते हैं। इसके साथ ही विटामिन डी, बादाम, अखरोट जैसे सूखे मेवे, मछली या ओमेगा थ्री फैटी एसिड्‌स के अन्य स्रोत, आदि भी स्वास्थ्य के लिहाज से सहायक हो सकते हैं।

यह भी रखें ध्यान

अस्थमा एक जैसी स्थिति है जिसमें स्वस्थ जीवनशैली, पोषक भोजन और ट्रिगर का ध्यान रखने से काफी आराम मिल सकता है। ट्रिगर्स संबंधी जानकारी और अस्थमा के अटैक के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों को लेकर डॉक्टर से पूछें। यदि दवा या इन्हेलर का उपयोग कर रहे हैं तो उनके इस्तेमाल को लेकर भी पूरी सावधानी रखें। साथ ही यह भी जानें कि क्या खाने से नुकसान हो सकता है। पर्याप्त सावधानी रखकर अस्थमा के साथ भी सामान्य जीवन जिया जासकता है।

कॉफी से घटाइए वजन

ये बात पढ़कर शायद कॉफी के शौकीन खुश हो जाएं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप केवल कॉफी पर ही निर्भर होकर रह जाएं। शोधकर्ता असल में कॉफी की एक खूबी की ओर इशारा कर रहे हैं। जानिए क्या है यह खूबी।

यूके में हुए एक शोध के अनुसार कॉफी का सेवन शरीर में मौजूद ब्राउन फैट को प्रेरित करता है। ब्राउन फैट असल में वसा का एक ऊर्जा पैदा करने वाला प्रकार है जो कि कैलोरीज को जलाने में मदद करता है। यह प्रक्रिया थर्मोजेनेसिस कहलाती है। शोध के अनुसार कॉफी के एक कप में ही ब्राउन फैट सीधे असर करने की क्षमता होती है। खास बात यह है कि पहले यह माना जाता था कि यह ब्राउन फैट केवल मनुष्यों के छोटे बच्चों और कुछ विशेष जानवरों में पाया जाता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सामान्य वयस्क इंसानों में भी इसके होने की पुष्टि हुई है।

इतना ही काफी नहीं जाहिर है कि मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों को ये बात राहत दे सकती है लेकिन शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि शरीर को मिलने वाले यह थर्मोजेनिक गुण इतने कम हैं कि केवल इनपर निर्भर होकर नहींरहा जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोज एक से दो कप कॉफी (बिना शकर, कम दूध के साथ या हो सके तो ब्लैक) फायदा दे सकती है लेकिन इसके साथ ही नियमित दिनचर्या, संतुलित डाइट और व्यायाम का होना भी जरूरी है। ये सभी मिलकर अच्छे परिणाम दे सकते हैं। यही नहीं इनसे डायबिटीज और उच्च रक्चाप जैसी समस्याओं से बचने में भी सहायता मिलती है।

Posted By: Sonal Sharma

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