Eye Stroke: रेटिना की आर्टरी में किसी वजह से आए ब्लॉकेज से रेटिना को ऑक्सीजन युक्त खून मिलना बंद हो जाता है। इस समस्या को आई स्ट्रोक भी कहते हैं। छोटे बच्चे भी इस बीमारी से प्रभावित होकर नजर की गंभीर समस्या से पीड़ित हो जाते हैं।

आंखों को प्रभावित करने वाले स्ट्रोक को रेटिनल आर्टरी ऑक्लूशन भी कहा जाता है और यह मरीज के रेटिना की रक्त नलिकाओं को अवरुद्घ कर देता है। रेटिना आंखों के पीछे का हल्का-संवेदनशील टिश्यू होता है। यह ब्लॉकेज किसी रक्त नलिका में थक्का बनने के कारण, रक्त नलिका सिकुड़ने के कारण अथवा रक्त नली में कोलेस्ट्रॉल जमने के कारण होता है। आंखों को प्रभावित करने वाले स्ट्रोक का सबसे सामान्य लक्षण अचानक उभरता है और बिना किसी दर्द के दृष्टि कमजोर पड़ने लगती है। उसे 12 साल की उम्र से था चश्मा आर्टरी ऑक्लूशन (आई स्ट्रोक) की समस्या से पीड़ित पंकज सलूजा (20 साल) 50 हजार लोगों में से एक है।

वह 12 साल की उम्र से जब से चश्मा लगा रहा था तब से एक बार भी उसके चश्मे का पावर कम नहीं हुआ था। पंकज आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था और बहुत ही मेहनती छात्र है। उसके माता-पिता भी सोचते थे कि लगातार पढ़ाई करते रहने के कारण चश्मा पहनना मामूली बात है। पर लगातार बढ़ते पावर और चश्मे पर बढ़ती निर्भरता से पंकज की दृष्टि विकृत होने लगी थी और पढ़ाई के दौरान काले धब्बे नजर आने लगते थे।

बड़ों की बीमारी अब छोटों को छोटे बच्चों में इस तरह की समस्या बहुत कम देखी गई है। रेटिनल आर्टरी ऑक्लूशन अमूमन 40 साल से ऊपर के व्यक्तियों में ही पाया जाता है। उम्र के साथ-साथ लोगों को डायबिटीज,हाइपरटेंशन, कार्डियोवैस्कुलर समस्याएं और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की शिकायतें भी हो रही हैं। यही वजह है कि छोटे बच्चों की आंखों की महत्वपूर्ण रक्त नलिकाओं में थक्के बनने लगे हैं।

जांच से हुआ मालूम अस्पताल में हुई जांचों से मालूम हुआ कि पंकज को आई स्ट्रोक हुआ है जिसे तकनीकी भाषा में 'ब्रांच रेटिनल आर्टरी ऑक्लूशन' के नाम से जाना जाता है। मरीज की दाईं आंख में अवरुद्ध रक्त नलिकाओं की जांच के लिए फ्लोरेसीन एंजियोग्राफी की गई। इसके अलावा उसके ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल, ब्लड प्रेशर और आरबीएस स्तर की भी जांच कराई गई जिसमें पाया गया कि उसका कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई है।

इलाज बहुत सरल था उसे रोगमुक्त करने के लिए बहुत सरल इलाज किया गया जिसमें कार्बन डाईऑक्साइड- ऑक्सीजन का मिश्रण सूंघने के लिए कहा गया जिससे आर्टरी के फैलने में मदद मिलती है। उसकी आंख से कुछ तरल पदार्थ निकाला और देखा गया कि अब उसकी रेटिना से कुछ धब्बे गायब हो गए हैं। हालांकि वह अभी भी पावर का चश्मा लगा रहा है, लेकिन अब ब्लाइंड स्पॉट के लक्षण उसे नहीं दिखते हैं और अब वह चश्मे से निजात पाने के लिए ड्रॉप डालने के साथआंखों का व्यायाम भी कर रहा है।

Posted By: Sonal Sharma

  • Font Size
  • Close