लोग खुश रहने के लिए खूब कोशिश में लगे रहते हैं। हम अक्सर सोचते हैं कि अब वे ही काम करेंगे जो हमें सच्ची खुशी दें। इस अवसर पर हम कुछ चीजों को लेकर यह सोचते हैं कि अगर वो मिल जाए तो हमें सच्ची खुशी मिल जाएगी, लेकिन हमारे ऐसे अंदाजे गलत ही साबित होते हैं। यह एक तरह की मरीचिका ही साबित होती है। डाइजेस्ट नामक पत्रिका में छपे शोध में कुछ तरीकों को जीवन की सच्ची खुशी का स्रोत बताया गया है।

पैसा के पीछे मत भागिए

कुछ लोग ज्यादा पैसा कमाकर खुशी पाने का लक्ष्य बनाते हैं। मगर याद रहे कि पैसे से आप खुशियां नहीं खरीद सकते, क्योंकि पैसे से आप बहुत क्षणिक खुशी ही हासिल कर पाते हैं। मगर यह भी सच है कि सामान्य लोगों की तुलना में पैसे वालों को अधिक सुखी देखा जाता है। अगर आपके पास पैसा है तो लोग आपको अधिक इज्जत देंगे और इससे आपको अच्छा एहसास होगा। लेकिन कम पैसे वाले लोग भी अपनी इच्छाओं को सीमित रखकर खुश रह सकते हैं।

इच्छाओं को कम कीजिए

1980 में हुए एक शोध में यह बात सामने आई कि जिन लोगों की इच्छाएं अधिक होती हैं उनके जीवन में सुख कम होता है और वे सुख के तलाश की बजाय अपने इच्छाओं की पूर्ति में ध्यान लगाते हैं और हमेशा उसे पूरा करने के लिए ही दुखी रहते हैं। क्योंकि ऐसे लोगों की एक इच्छा की पूर्ति के बाद दूसरी इच्छा पनपती है और जीवनपर्यंत यही चलता है। इच्छाएं कम कीजिए और सुख से जिएं।

सामाजिक बुद्धिमत्ता की जरूरत

इस शोध में यह बात भी सामने आई कि बुद्धिमत्ता का खुशियों पर कोई असर नहीं पड़ता। एक सामान्य बुद्धि का व्यक्ति भी ज्यादा खुशी महसूस कर सकता है। बुद्धिमान लोग हमेशा अपनी जरूरतों को पूरा करने के प्रयत्न करते हैं और इन्हें पूरा करने के प्रयास करते हैं, इससे वे पूरी तरीके से खुशहाल जीवन नहीं जी पाते हैं। जबकि खुश रहने के लिए 'सामाजिक बुद्धिमत्ता' होना बहुत जरूरी है।

परिवार से मिलती है खुशी

हमारी भावनाएं और इच्छाएं काफी हद तक परिवार और रिश्तों पर भी निर्भर करती हैं। शोध में यह बात भी सामने आयी लगभग 90 प्रतिशत लोग अपने पारिवार के अच्छे और बुरे व्यवहार के कारण सुखी या दुखी रहते हैं। अगर परिवार के लोग पहले से ही सामाजिक हैं तो वे अधिक सुखी रहते हैं और उनकी अगली पीढ़ी भी सामाजिक हो जाती है।

सुंदरता से खुशी का रिश्ता

जो लोग दिखने में सुंदर होते वे अधिक खुश रहते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि पूरा जीवन ही खुशमय होना चाहिए न कि शारीरिक सुंदरता। लेकिन जो लोग अच्छे दिखते हैं उनका इम्यून सिस्टम भी अच्छा होता है और वे शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। खूबसूरत लोगों के मन में हीन भावना नहीं आती है, क्योंकि दूसरे लोगों के सामने उन्हें अधिक तवज्जो भी मिलती है।

दोस्ती से जुड़ी है खुशी

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो जीवन में हमें सबसे अधिक खुशी देता है। दोस्तों का साथ पाते ही लोग अपने दुखों को भूलकर खुशियों की तलाश करने लगते हैं। दोस्तों के साथ मस्ती के दौरान हम सारे दुखों को भूल जाते हैं। दोस्त कैसा भी हो वह हमें खुशी ही प्रदान करता है।

दूसरों की भलाई

जो लोग दूसरों की मदद या भलाई करते हैं वे अपने भीतर खास तरह की खुशी पाते हैं। परोपकार यानी दूसरों की सहायता करने के बाद में संतोष का भाव पैदा होता है जो हमें खुश रहने के लिए प्रेरित करता है। यह वास्तविक खुशी होती है जिसे व्यक्ति अपने भीतर तक महसूस करता है।

खुशी और उम्र

हालांकि खुश रहने की कोई उम्र नहीं होती है, लेकिन उम्रदराज लोग अधिक खुश रहते हैं। क्योंकि अपने जीवन में निर्धारित लक्ष्यों को उम्र के इस पड़ाव तक वे प्राप्त कर चुके होते हैं, उनके जीवन की सभी इच्छाएं पूरी हो चुकी होती हैं। जबकि युवावस्था के बाद लोग अपने पेशे पर ध्यान देते हैं अपने निर्धारित लक्ष्यों को पाने के प्रयास में दुखी रहते हैं।