किसी भी बीमारी से जूझने के दौरान अक्सर पीड़ित उन सरल उपायों की तरफ ध्यान नहीं दे पाता जो उसे कुछ राहत पहुंचा सकते हैं। माइग्रेन के दर्द के मामले में यूं लोग आमतौर पर हर उपाय अपना चुके होते हैं, लेकिन कई बार बहुत बेसिक चीजों को जानना लाभदायक हो सकता है।

ट्रिगर पर ध्यान

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है क्योंकि माइग्रेन के मामले में हर व्यक्ति अलग तरह के ट्रिगर (वह स्थिति या साधन जो

दर्द को उभारता है) का सामना करता है। ऐसे में अपने ट्रिगर को पहचानना सबसे मूलभूत तरीका है, परेशानी को

कम करने का। जैसे तेज धूप या रोशनी से बचाव, डाइट में परिवर्तन लाना आदि। इसके अलावा भूखे न रहना, भरपूर पानी पीना और भरपूर नींद लेना आदि भी सहायता कर सकते हैं। आजकल ऐसे एप भी उपलब्ध हैं जो आपके मोबाइल में ट्रिगर्स का लेखा-जोखा रखने में मदद कर सकते हैं। देर तक रोशनी में बैठकर काम करना आपके लिए माइग्रेन का कारण बन सकता है।

एक्सरसाइज का डोज

नियमित व्यायाम, खासतौर पर कार्डियो वर्कआउट, एंडोर्फिन नामक रसायनों के स्तर में बढ़ोत्तरी करता है। ये रसायन दर्द और स्ट्रेस में कमी लाकर प्रसन्नता के अहसास को बढ़ाते हैं, लेकिन व्यायाम के पहले स्ट्रेचिंग और वार्मअप की प्रक्रिया जरूर अपनाएं। योग और ध्यान को भी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। अपनी डाइट को खनिज, विटामिन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर बनाएं। समय-समय पर अपनी अन्य दवाइयों जैसे एंटीडिप्रेसेंट या एसिडिटी की दवाइयों को लेकर डॉक्टर से राय लेना भी जरूरी है, क्योंकि येभी माइग्रेन के लिए ट्रिगर का काम कर सकती हैं। माइग्रेन के आने के पहले कुछ लक्षण अधिकांशतः कुछ घंटे या एक दिन पहले से सामने आने लगते

हैं, इन्हें समझते ही तुरंत दवाई ले लें, दर्द के बढ़ने का इंतजार न करें।

माइग्रेन के दर्द से राहत पानी है तो सबसे आसान तरीका है मसाज। आप या तो खुद या किसी से अपनी मसाज करवाएं। मसाज से ब्‍लड सर्कुलेशन को बूस्‍ट होगा जिससे आपको आराम मिलेगा और दर्द भी कम होगा।

माइग्रेन के लक्षण समझें

पूरे या आधे सिर में तेज दर्द, तेज आवाज या रोशनी से घबराहट, उल्टी आना या जी मचलाना, किसी काम में मन न लगना, भूख कम लगना, पसीना अधिक आना, कमजोरी मसूस होना, आंखों में दर्द या धुंधला दिखाई देना।

Posted By: Sonal Sharma