मुंह और गर्दन के कैंसर मुख्यतः व्यक्ति की जीवनशैली की गतिविधियों के कारण विभिन्न कार्सिनोजेन्स के संपर्क में आने कारण होते हैं। लगभग 85 प्रतिशत मरीज तम्बाकू एवं उसके पदार्थों के सेवन के कारण इस बीमारी का शिकार बनते हैं। तंबाकू का प्रयोग तत्काल बंद करने से इन दोनों स्थानों पर होने वाले कैंसर को रोका जा सकता है।

मुंह और गर्दन के कैंसर होने के अन्य कारणों में शराबखोरी, सुपारी या कत्था खाना, खराब मौखिक स्वच्छता, तेज दांत और एचपीवी वायरस शामिल हैं। यदि प्रारंभिक स्टेज में बीमारी का पता चल जाए तो उपचार के बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से भारत में इस बीमारी के इलाज के परिणाम सुखद नहीं होते हैं। इसकी वजह यह है कि मरीज एडवांस्ड स्टेज में अस्पताल पहुंचता है।

मुंह और गर्दन के कैंसर के लक्षण

1. गले में खराश या अल्सर जो 14 दिनों के भीतर ठीक नहीं होता है।

2. मुंह के नरम ऊतकों का लाल, सफेद या काला होना

3. कोई भी असामान्यता जिसे छूने पर खून बहता है।

4. कोई गांठ या कठोर स्थान जो सामान्य नहीं हो, आमतौर पर जीभ की सीमापर।

5. त्वचा की सामान्य सतह से उपर उभरी हुई कोई गठान या सख्त ऊतक

6. जबड़े में कोई छाला या उभार जो दन्त उपचार से भी ठीक न हो

7. कृत्रिम दांत के नीचे कभी न ठीक होने वाला जख्म हो चुका हो

8. दो सप्ताह से अधिक समय तक गर्दन के बाहर दर्द रहित,सख्त गांठ महसूस हो

9. कभी न ठीक होने वाली गले की खराश

10. लगातार खांसी जो ठीक नहीं हो रही।

11. भोजन निगलने में कठिनाई या दर्द जो अधिक समय से बरकरार है।

12. आवाज का बदलना या कमजोर पड़ना 13. कान का दर्द (एक तरफ का) जो कई दिनों से बरकरार है।

क्या है सावधानी

तंबाकू अथवा धूम्रपान को तत्काल त्याग दें। तंबाकू में 18 ऐसे घातक रसायन हैं जिनसे कैंसर होता है। तंबाकू में 4000 से अधिक विषैले रसायन होते हैं। तंबाकू में कोई भी तत्व ऐसा नहीं है जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारक हो।

क्या हैं उपचार के विकल्प

कैंसर के उपचार में सर्जरी, कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी का संयोजन शामिल है। सिर और गर्दन के कैंसर के लिए प्राथमिक उपचार पद्धति सर्जरी (जब भी संभव हो) और रेडियोथैरेपी शामिल हैं। कीमोथैरेपी का उपयोग हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट केआधार पर किया जा सकता है। इसके अलावा कैंसर के संभावित कारणों की रोकधाम जैसे तंबाकू और धूम्रपान के सेवन पर प्रतिबंध लगाएं। कृत्रिम दांतों की तेज धार को ठीक करवा लें। डेंचर ऐसा हो कि उसकी वजह से मुंह में जख्म न हो। इलाज का निर्धारण मरीज की शारीरिक स्थिति एवं कैंसर की स्टेज देख कर किया जाता है। प्रारंभिक स्टेज में केवल सर्जरी या रेडियोथैरेपी (ब्रेकिथैरेपी के द्वारा) से उपचार संभव है लेकिन मरीज एडवांस स्टेज का है तो इलाज स्थिति के अनुसार सर्जरी, रेडियोथैरेपी एवं कीमोथैरेपी के समावेश द्वारा किया जाता है।

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