Ear Infection: बारिश के मौसम में छोटे बच्चों के कान में अक्सर संक्रमण हो जाता है। इसकी वजह से बच्चों को बहुत तेज दर्द होता है। ऐसे में बच्चा अक्सर कान को हाथ लगाकर रोता है। सावधानी रखते हुए छोटे बच्चों को कान के दर्द से बचा सकते हैं।

बारिश में कई कारणों से कान में संक्रमण हो जाता है। कई बार बच्चों को नहलाते समय अथवा बारिश में भीग जाने की वजह से उनके पर्दे के पीछे पानी भर जाता है जिसे मिडिल इयर इफ्युजन कहते हैं। यह पानी कभी-कभी संक्रामक हो जाता है। पानी भरने के कारण कान में दर्द होता है और बच्चों को कम सुनाई देने की शिकायत होती है। इस पानी को पर्दे में चीरा लगाकर निकाला जाता है। बार-बार पानी भरने की शिकायत को नियंत्रित रखना मुश्किल हो तो एक छोटी-सी नली जिसे ग्रोमेट कहते हैं पर्दे में डाली जाती है जिससे पानी निकलता रहता है। कुछ दिनों के बाद इसे निकाल दिया जाता है। इसके अलावा कान के अंदरूनी हिस्से का संक्रमण बहुत अधिक पाया जाता है। इसमें कान में तीव्र दर्द होता है।

इन बच्चों को होता है कान का संक्रमण 1 स्तनपान नहीं करते, बॉटल से दूध पीते हैं। 2 जन्मजात मुंह की विकृति के साथ पैदा होते हैं। इनमें कटे-फटे होंठ और तालू तक सभी विकृतियां शामिल हैं। 3 नाक की ही टेढ़ी होना : इन सभी समस्याओं का समुचित इलाज नाक कान गला रोग विशेषज्ञ की देखरेख में होना चाहिए। इसके अलावा छोटे बच्चों को संक्रमणों से बचाने के लिए हर संभव कोशिश करें।

कम सुनने लगता है बच्चा

बारिश में अक्सर बच्चों को बुखार,जुकाम, पतले दस्त, चिड़चिड़ाहट जैसी समस्या हो जाती है। जांच करने पर कान का पर्दा लाल दिखता है। कभी उसमें खिंचाव या सूजन दिखती है। इस समस्या के चलते एक-दो दिन में कान से मवाद (खून मिश्रित) बहने लगता है। ऐसे में बच्चों को एंटीबॉयोटिक, दर्द निवारक, डीकन्जेस्टेंट व कान में डालने के लिए एंटीबायोटिक ड्रॉप्स दिए जाते हैं। साधारणतया 3-6 दिन में बीमारी ठीक हो जाती है और 10- 14 दिन में पर्दे का छेद भर जाता है।

कारण जानकर होता है इलाज

बार-बार संक्रमण हो तो उसका कारण जानकर उसका इलाज किया जाता है। खराब टांसिल्स और एडीनायड्‌स कोनिकाला जाता है। नाक की टेड़ी हड्‌डी की सर्जरी की जाती है अथवा तालू का ऑपरेशन किया जाता है। उचित इलाज न होने पर कभी-कभी मरीज के चेहरे पर लकवा, मस्तिष्क ज्वर, भेंगापन जैसी घातक बीमारियां हो जाती हैं।

क्या रखें सावधानियां

बच्चों को बारिश में सर्दी जुकाम से बचाएं, गंदे पानी के तालाब में न दें। बारिश में भीगने से रोकें। बच्चों को कुछ महीनों में नियमित रूप से कान की सफाई करवाने के लिए चिकित्सक के पास जाएं। देश में टीबी जैसी घातक बीमारियां पैर जमाए हुए है। ऐसे बच्चों को कान का टीबी भी हो सकता है। उस स्थिति में अत्यधिक मवाद आता है और पर्दे में एक से अधिक छेद हो सकते हैं। इस बीमारी में शल्य चिकित्सा के साथ-साथ तपेदिक की दवाइयां भी दी जाती है जिससे बीमारी पूर्ण रूप से ठीक हो सके।

- डॉ.माधवी पटेल नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ, इंदौर

Posted By: Sonal Sharma

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