आज की जीवनशैली ऐसी है कि पहले की पीढ़ियों के मुकाबले हमें अपने मस्तिष्क से कहीं अधिक काम लेना पड़ता है और यह कहीं अधिक दबाव में रहता है। शारीरिक श्रम की कमी व कुछ अन्य आधुनिक आदतें भी आपके ब्रेन पॉवर को कम कर देती हैं। मगर आप अपने दिमाग को दुरुस्त रखने के लिए थोड़े प्रयास करें, तो फायदा होगा।

खानपान की आदतें बदलें :

अच्छा खानपान केवल हमारे शरीर के लिए ही नहीं, दिमाग के लिए भी जरूरी होता है। ब्रेन पॉवर के लिए आप अपनी डाइट में छोटे-छोटे परिवर्तन कर सकते हैं। मसलन, दोपहर में चाय या कॉफी के बजाए ग्रीन टी लेना शुरू करें। ग्रीन टी में कैफीन कम होती है और एंटी ऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को क्षति से बचाते हैं। इसके साथ ही, धुएं में पकाई गई चीजों से दूर रहें। सब्जियों से भरपूर डाइट व ऑलिव ऑइल मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कंफर्ट जोन से बाहर आते रहें :

यदि आप अपने मस्तिष्क को नियमित तौर पर उत्प्रेरित करते रहें व चुनौतियां देते रहें, तो वह अधिक समय तक फिट रहता है। हमारा दिमाग, हम जितना उसे मानते हैं, उससे कहीं अधिक लचीला होता है। यह काफी आसानी से पुरानी आदतें भुलाकर नई आदतें अपना सकता है। आप मस्तिष्क का लचीलापन बनाए रखने के लिए अपनी ओर से प्रयास करते रहें। कोई नई भाषा सीखें या फिर कोई वाद्य बजाना सीखें। यह दिमाग को लचीला बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।

सोशल लाइफ हो सक्रिय :

दोस्तों-रिश्तेदारों से मेलजोल बनाए रखना मस्तिष्क को सुचारू बनाए रखने के लिए जरूरी है। इसलिए लोगों से मिलना-जुलना किसी हाल में कम न करें। उनके अनुभवों से सीखें, साथ-साथ कुछ एक्टिविटीज करें। फिर देखें, कैसे बढ़ता है आपका ब्रेन पॉवर।

नींद से समझौता न करें:

ब्रेन पॉवर के लिए नींद भी बहुत जरूरी है। जब हम सोते हैं, तो हमारे मस्तिष्क में मौजूद न्यूरो टॉक्सिन्स (विषैले पदार्थों) की सफाई हो जाती है। मगर इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है, इसलिए प्रतिदिन लगभग आठ घंटे की नींद लेना जरूरी है। यदि मस्तिष्क में न्यूरो टॉक्सिन्स का जमाव होता चला जाए, तो इसका अंजाम अल्जाइमर व पार्किंसंस रोग में भी हो सकता है।

रोज 20 मिनट तक शरीर हिलाएं-डुलाए

शारीरिक सक्रियता पूरे शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क में भी रक्त के संचार को बेहतर बनाती है। इससे याददाश्त सुधरती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं की वृद्धि होती है। यह पाया गया है कि शारीरिक कसरत का मस्तिष्क पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है, जैसा कि एंटी-डिप्रेसेंट्स के कम डोज का। इससे स्ट्रेस हार्मोन्स की मात्रा में गिरावट आती है। अधिकतम लाभ के लिए प्रतिदिन लगभग 20 मिनट शारीरिक कसरत करें।

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