योग शारीरिक शक्ति के विकास और चित्त नियंत्रण की अभ्यास क्रिया है। योग को साधना भी कहा गया है जो किसी प्रशिक्षित योग गुरू से ही सीखी जा सकती है। टीवी पर आने वाले प्रोग्राम अथवा सीडी के माध्यम से टैक्निक सीखी जा सकती है लेकिन योग की बारीकियां केवल योग्य गुरू ही सिखा सकते हैं।

योग साधक की मन की शुद्धता की पूर्णता को प्राप्त कर आता है और इन लाभों को प्राप्त करने हेतु योग साधक को ध्यान पूर्वक प्रयास करने होते हैं। आमतौर पर योगाभ्यास शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए किए जाते हैं किंतु अनजाने में ही मानसिक शांति योग साधक को प्राप्त हो जाती है। वह जीवन और संसार के चित्त विकारों को नियंत्रित करना सीख जाता है । योग की विभिन्ना कक्षाएं विभिन्ना गुरुओं द्वारा समक्ष में टीवी पर प्रस्तुत होती रहती हैं किंतु एक नए योग साधक को सही साधना सीखने के लिए क्या करना चाहिए आइए यह जानते हैं।

- सही दिशा निर्देश प्राप्त करें फिर चलने का अभ्यास कर आदर्श रूप में साधक को प्रातःकाल में ही शौच इत्यादि से निवृत्त होकर योग संबंधी अभ्यास हेतु प्रस्तुत होना चाहिए।

- स्नान करके या बिना स्नान के योग अभ्यास करना किसी भी साधक की व्यक्तिगत पसंद हो सकती है।

- प्रातः काल में समय अभाव हो तो किसी भी समय योगाभ्यास किया जा सकता है। भोजन 3 घंटे पूर्व किया गया हो तो लाभ अधिक है।

- श्रेष्ठ यही है कि स्वच्छ हवा के वातावरण में खाली पेट निव्रत्त होकर, योग किया जाए ताकि तन और मन एकाकार हो सके। योगाभ्यास के पूर्व स्थिर मन से योग गुरु या अपने इष्ट का स्मरण कर प्रार्थना करें।

- योगाभ्यास के दौरान सुखासन की अवस्था कायम रखें और जितनी शक्ति तथा जोड़ों में लोच की गति आसानी से प्राप्त हो सके उतना ही जोर लगाएं। अपनी शक्ति को अपने पड़ोसी योग साधक से तुलना ना करें। यह योगाभ्यास है प्रतियोगिता नहीं। हर मानव शरीर दूसरे व्यक्ति से भिन्ना है और प्रत्येक साधक की क्षमता व सीमाएं फर्क हैं।

- योग साधक के समक्ष यह प्रश्न हमेशा रहता है कि अभ्यास कहां किया जाए तो उसका उत्तर यह है कि जहां स्वच्छ वायु का निरंतर संचार होता है वह स्थान श्रेष्ठ है। यह चाहे बारामदा हो अथवा घर की छत। कहीं भी योगाभ्यास किया जा सकता है। योगाभ्यास का स्थान जीव जंतु या पशु इत्यादि से सुरक्षितहोना चाहिए। पतली दरी या योगा मैट पर अभ्यास करें। यदि कमरे में योग करना हो तो दरवाजे खिड़की खुली रखें। पंखा, टीवी बंद करें।

- योगाभ्यास के दौरान प्यास लगे तो पानी पी सकते हैं लेकिन भोजन करना वर्जित है।

- योग क्रिया में सम्मिलित आसन प्राणायाम करने के पूर्व भी वार्म अप करना अनिवार्य है जिसे सूक्ष्म व्यायाम कहते हैं।

- साधक को सदैव छोटे-छोटे लक्ष्य रखकर अभ्यास अधिक आवृत्ति के साथ करने में उचित परिणाम प्राप्त होते हैं। कुशल प्रशिक्षक के निर्देशन में आपको उचित परिणाम प्राप्त होंगे।

क्या हो सकते हैं योगाभ्यास के लाभ

- शरीर में ऊर्जा की पूर्ति एवं सकारात्मक प्रभाव

- शरीर के ऊतकों में क्षय में कमी

- प्राणवायु का कोशिका में प्रवाह

- शिराओं में रक्त के जमाव से मुक्ति

- लसिका तंत्र में जमाव से मुक्ति


- चित्त में निरंतरता एवं स्थायित्व

- धैर्य की भावना का संचार

- मन का कठोर संयम

- योगाभ्यास से ये सभी गुण प्राप्त होते हैं। पूरे शरीर के साथ मन और चित्त की शांति केवल योगासनों के निरंतर अभ्यास से ही हासिल हो सकती है। एक योग्य योगगुरू तलाशें और उसके दिशा निर्देशों पर कायम रहते हुए योगाभ्यास करें।

Posted By: Sonal Sharma