International Yoga Day 2019: भारतीय संस्कृति में योग अनादिकाल से अस्तित्व में है। प्राचीनकाल में योगाभ्यास को जीवनशैली का हिस्सा माना जाता था। आज बीमार होने के बाद योगाभ्यास की ओर झुकाव होता है। नियमित योगाभ्यास से कई बीमारियां जड़ से दूर होती हैं और कई बीमारियां पैदा ही नहीं होतीं। आइए विभिन्न बीमारियों के संदर्भ में इनकी भूमिका को बारे में समझते हैं कई आसन ऐसे हैं जिन्हें जीवनशैली में शामिल कर नियमित अभ्यास क्रम में रखा जाना चाहिए।

सूर्यनमस्कार इनमें से एक है और सबसे महत्वपूर्ण आसन माना जाता है। इसी तरह अन्य आसन भी हैं जिनका नियमित अभ्यास स्वस्थ रखेगा। आधुनिक जीवनशैली से संबंधित कई बीमारियां हैं जैसे सिरदर्द, कमर दर्द, सर्दी जुकाम, एकाग्रता की कमी आदि को आसनों के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

सिरदर्द

सिरदर्द को दूर करने के लिए योगाभ्यास का क्रम इस प्रकार है-

आसन-कंधरासन- ब्रह्ममुद्रा (गर्दन का संचालन आगे पीछे -10 बार करें।

दाएं बाएं झुकाना- 10 बार

दाएं बाएं मोड़ना- 10 बार

सर्वांगआसन, उत्तानपाद आसन,पश्चिमोत्तान आसन तथा शवासन

क्रिया- जलनेति, कुंजल क्रिया

प्राणायाम- अनुलोम विलोम 27 बार

शीतली - 11 बार

तीव्र सिरदर्द में भ्रामरी -11 बार

सीधा बैठकर या शवासन में लेटकर मन को श्वांस पर केंद्रित करना

100 बार विपरीत क्रम में गिनना (5-10 मिनट)

सर्दी जुकाम से राहत पाने के लिए करें ये योगाभ्यास

कपाल भाति प्राणायाम का अभ्यास एवं गर्दन को आगे, पीछे, दाएं, बाएं स्ट्रेच करने का अभ्यास करें।

सूर्यभेदी प्राणायाम करें- इस अभ्यास में दाहिनी नासिका से सांस लेना और छोड़ना ऐसा 21 बार करें।

आहार कम करें- मीठे का सेवन कम कर दें। हर मौसम में गुनगुना पानी पिएं तथा विटामिन सी का अधिक सेवन करें। कंधों का ऐसा संचालन हो कि जिससे श्वसन तंत्र की रुकावट दूर हो।

इसके लिए करें ये आसन- मार्जरी आसन, वक्रासन, उत्तान मंडूकासन, भुजंगासन और अर्ध हलासन

कमर दर्द के लिए आसन

- सीधे बैठकर या जमीन पर लेटकर शरीर को शिथिल एवं ढीला छोड़ना।

- रीढ़ के प्रत्येक भाग को रिलेक्स करना।

- 40 बार लंबा और गहरा श्वांस पूर्ण सजगता के साथ लेना

- मार्जरी आसन, सेतुबंधासन, एक पैर उत्थितासन, शलभासन, भुजंगासन, शवासन, मत्स्य क्रीडासन,ताड़ासन

का अभ्यास भी जरूर करें।

- रीढ़ को हमेशा सीधा रखना और गहरी श्वांस का अभ्यास करना

- तीव्र दर्द में शवासन या मकरासन में आराम करना

- आलस्य और थकान को दूर करने वाले आसन

- चेअर अथवा जमीन पर आसन लगाकर सीधा बैठना

- 11 बार औंकार ध्वनि का धीरे-धीरे उच्चारण करना तथा ध्वनि को मस्तिष्क तक पहुंचता हुआ अनुभव करना

- 11 बार भ्रामरी प्राणायाम करना

- इसके साथ सूर्य नमस्कार, त्रिकोणासन, अर्धकटिचक्रासन, उत्तान मंडूक आसन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, उत्तान पादासन तथा नौकासन कर सकते हैं।


तनाव मुक्ति के आसन

1. दीर्घ श्वसन (यौगिक श्वसन)

2. उदर श्वसन - इस अभ्यास में पेट पर हाथ रखकर हर श्वांस के साथ पेट को फुलाएं और छोड़ने के साथ दबाएं

3. सीने से सांस लेना- इस अभ्यास में सीने वाले भाग को श्वास प्रश्वास में अधिक सजगता से प्रयोग करना

4. कंधों से सांस लेना- इस अभ्यास में श्वास लेते समय कंधा उपर उठेगा तथा सांस छोड़ते समय कंधा नीचे आ जाएगा

5. भ्रामरी प्राणायाम 11 बार करें- इस अभ्यास में मंद-मंद गति से 'म' शब्द का गुंजन करना

6. बैठकर आंखें बंद कर पूरे शरीर का अवलोकन करना शिथिल होने का निर्देश देना

7. सूर्यनमस्कार, संतुलन के आसन, वृक्षासन आदि करें।

एकाग्रता बढ़ाने के लिए करें ये अभ्यास

- चेअर पर अथवा जमीन पर किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठना

- रीढ़ को सीधा रखते हुए यौगिक श्वसन करना

- सजगता के साथ 21 बार कंधा, सीना एवं पेट का उपयोग करते हुए सांस भरना और छोड़ना

- ब्रह्ममुद्रा में गर्दन को आगे और पीछे 11 बार, दाएं बाएं झुकाना 11 बार, दाएं बाएं मोड़ना 11 बार

- इसके साथ भ्रामरी प्राणायाम 11 बार

- उज्जायी प्राणायाम 11 बार

- औंकार ध्वनि का उच्चारण 11 बार

- सूर्य नमस्कार, वृक्षासन, बकासन, नटराजासन, पद्मासन, शीर्षासन का अभ्यास करें।

- ऑर्थ्राइटिस के दर्द से छुटकारा दिलाएंगे ये योगाभ्यास

- प्रत्येक जोड़ पर अपनी एकाग्रता या सजगता ले जाकर धीरे-धीरे मांसपेशियों को सख्त करना तथा ढीला करना। इसे आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज भी कहा जाता है।

- अनुलोम विलोम तथा नाड़ी शोधन प्राणायाम 21 बार करें।

- सूर्य भेदी प्राणायाम 5 बार

- औंकार ध्वनि का उच्चारण 11 बार

- योग निद्रा और शवासन दोनों क्रमशः 30 मिनट तक

रक्तचाप नियंत्रण करेंगे ये योगाभ्यास

- यौगिक श्वसन 10 मिनटचेअर पर बैठकर एवं शरीर को ढीला छोड़कर करें।

- चंद्रभेदी प्राणायाम यानी बाएं स्वर से ही श्वास लेना और छोड़ना। यह अभ्यास 21 बार करें।

- शीतली प्राणायाम में जिव्हा को आगे खींचकर गोल कर लें अब जिव्हा से छूती हुई प्राणवायू को फेफड़ों में भरना तथा नासिका से छोड़ना

- भ्रामरी प्राणायाम का 11 बार अभ्यास करें

- औंकार ध्वनि का मानसिक जप करें

मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा दिलाएंगे ये आसन

1. गहरी लंबी सांस प्रत्येक तीव्र दर्द में लाभकारी मानी जाती है।

2. अनुलोम विलोम एवं नाड़ी शोधन प्राणायाम करें।

3. योग निद्रा एवं शवासन

4. भ्रामरी एवं उज्जायी प्राणायाम

5. औंकार का उच्चारण

6. ध्यान का प्रयोग

तीव्र दर्द को छोड़कर अन्य समय में सूक्ष्‌म व्यायाम करें। प्रत्येक जोड़ को आवश्यकता एवं क्षमतानुसार कुछ समय के लिए खींचकर रखें फिर छोड़ दें। बाद में लंबी सांस लें। यह प्रयोग कुछ समय तक जारी रखें।

एसिडिटी एवं अपच की समस्याओं से निपटने के लिए आसन

1. शीतली प्राणायाम 11 बार करें

2. उज्जायी प्राणायाम 11 बार करें

3. खाना खाते समय अच्छी तरह से चबाकर खाएं

4. टीवी मोबाइल का इस्तेमाल भोजन के समय न करें

5. मन शांतरखकर सांसों के प्रति जागरूक रहें।

6. भोजन के बाद वज्रासन में बैठें

अन्य उपयोगी आसन भी आजमा सकते हैं पादहस्तासन, मेरूवक्रासन, पश्चिमोत्तानासन, उष्ट्रासन, धनुरासन, उत्तान पादासन एवं पवनमुक्तासन कर

बैचेनी को इन अभ्यासों से दूर भगाएं

1. उज्जायी प्राणायाम -11 बार करें

2. प्रणव का जप एवं औंकार का मंद-मंद स्वर में उच्चारण कर मन की एकाग्रता को श्वास एवं औं की आवाज पर रखना

3. शीतली प्राणायाम एवं गर्दन का संचालन जिससे मस्तिष्क में रक्त का संचार सुचारू रूप से हो सके।

4. भ्रामरी 11 बार

इन योगाभ्यासों को भी बैचेनी दूर करने के लिए प्रयोग करें मार्जरी आसन, शशकासन, भुजंगासन, शलभासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन

- डॉ. हेमंत शर्मा, योग विशेषज्ञ

Posted By: Sonal Sharma