यह सही है कि जानने के लिए पढ़ना और यात्राएं करना बहुत जरूरी है, क्योंकि घर से बाहर की दुनिया हमें बहुत कुछ सिखाती है। स्कूल-कॉलेज यूनिवर्सिटी में हम कुछ-न-कुछ सीखने ही जाते हैं। सीखने का क्रम लगातार जारी रहता है। बहुत सारा कुछ हम सीखते हैं, लेकिन फिर भी बहुत सारा कुछ ऐसा भी होता है जो हम कहीं से भी नहीं सीख पाते हैं। वो हमें जिंदगी ही सिखाती है। इसे ऐसा भी कह सकते हैं कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सबक किताबें और स्कूल- कॉलेज नहीं सीखा पाते हैं। वो हम इनसे बाहर जाकर सीखते हैं या ऐसे भी कह सकते हैं कि वो सिलेबस में नहीं सिखाए जाते हैं। कुछ ऐसी ही चीजें जो आपको अपने स्कूल-कॉलेज के दिनों में नहीं सिखाई गई थी, जानें वो क्या थीं?

प्यार की इबादत

स्कूल-कॉलेजों में आप सिलेबस पढ़ते हैं। अपने शौक पूरे करते हैं। दोस्तों और अजनबियों से संवाद करना सीखते हैं। हम समझने लगते हैं कि हम सब कुछ सीख गए हैं। जीवन जीने की कला भी हमने सीख ली है। जीवन का महत्वपूर्ण तत्व प्रेम ही वहां नहीं सिखाया जाता है। यह हमें नहीं बताया जाता है कि कैसे जाना जाए कि हमें किसी से प्रेम हुआ है और यदि कोई हमें प्रेम करता है तो हमें उससे कैसा व्यवहार करना चाहिए?

पैसों का गणित हम स्कूल-कॉलेजों में गणित भी पढ़ते हैं, खासतौर पर बीजगणित और अंकगणित... कॉमर्स भी और बैंकिंग भी। ये अलग बात है कि ये कभी व्यावहारिक जीवन में बहुत काम नहीं आया। ये कोई नहीं बताता है कि अपने पैसे का प्रबंधन करने के लिए किस तरह से बजट बनाना चाहिए। अपनी ही किताब बायोलॉजी पढ़ी, मनोविज्ञान भी पढ़ा लेकिन औपचारिक शिक्षा हमें खुद को जानने का गुर नहीं सिखाती है। यह स्वयं में छिपी किसी भी तरह की विशेषता और विशिष्टता तक हमें नहीं पहुंचाती है।

शिक्षा हमें सिखाती है कि बाहर निकलने से बेहतर है इसका हिस्सा हो जाओ। अनुभव सिखाते हैं कि यदि दुनिया को जीतना है तो बनाबनाए खांचे को सबसे पहले तोड़ो। कृतज्ञता व्यक्त करना हमें शुक्रिया कहना तो सिखाया जाता है, लेकिन हमें कहीं भी यह नहीं सिखाया जाता है कि किस तरह से अपने जीवन की सारी खुशियों, उपलब्धियों और वरदानों के लिए ईश्वर के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए।

असफलता का सामना करना दुनिया का कोई स्कूल, कोई कॉलेज आपको यह नहीं सिखाता है कि आप असफलता का सामना कैसे करें? यह हम अपने परिवेश और अनुभवों से ही सीख पाते हैं। यह तो बताया जाता है कि सफलता कैसे हासिल करें। असफल हो जाएं तो इससे कैसे निबटें, यह नहीं बताया जाता है। खुद को उपयोगी बनाने की कला मुझे स्कूल-कॉलेज ये सिखाते हैं कि मुझे अपने सिलेबस को बहुत अच्छे से पढ़ना है ताकि मुझे अच्छे नंबर मिल सके। यह नहीं बताते हैं कि मैं इससे मैं धरती के प्रति अपना क्या योगदान दूंगा। समाज के लिए क्या करूंगा? यह नहीं सिखाया जाता है।

Posted By: Sonal Sharma

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