बीते कई सालों से चिकित्सा विज्ञान ने नाक एवं सायनस की बीमारी को जानने के लिए कई आविष्कार किए हैं।इसीलिए जटिल से जटिल शल्य क्रियाओं को दूरबीन की सहायता से संपन्ना किया जा सकता है। दूरबीन, अत्यधिक,

आधुनिक उपकरण एवं जांच साधनों के आने से सायनस की बीमारियों का उपचार संभव हो सका है।

सुंदर, तीखी, चौड़ी नाक अंदर से कई बीमारियों की खदान हो सकती है। नाक न केवल हमारी पहचान है। परंतु एक महत्वपूर्ण अवयव है। यह एक सेंस ऑर्गन है। नाक के जरिए श्वास को छानकर अंदर लेने के साथ-साथ गंध का पता लगाने का काम भी लिया जाता है।

नाक के बीचोंबीच एक परदा होता है जिसे 'सेप्टम' कहते हैं। उसकी दोनों तरफ 3 हियों की रॉडनुमा संरचना होती है जिन्हें 'टर्बिनेट' कहते हैं। नाक के अंदर की सतह पर हर जगह जो चमड़ी होती है, उस पर खून की नलियों का जाल बिछा होता है। चमड़ी से निकलने वाला द्रव एक परत का काम करता है जिसे 'म्युकस ब्लेंकेट' कहते हैं। नाक केदोनों तरफ जुड़े होते हैं 4 जोड़ी कमरेनुमा 'सायनस'।

क्या तकलीफें हो सकती हैं सायनस में

- नाक का बंद होना

- नाक या गले से कफ निकलना, पानी आना

- अत्यधिक छीकें आना,

- नाक से खून आना (नकसीर)

- दुर्गंध और सुगंध का पता न चलना

- सिरदर्द होना

- आवाज में परिवर्तन आदि

यह भी याद रखें

विशेषज्ञों द्वारा मस्से निकालने के बाद भी वे पुनः हो सकते हैं जिसका कारण होता है एलर्जी, प्रदूषण, खानपान की

अनियमितता, शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति में कमी होना आदि। सायनस की सर्जरी होने के बाद भी जुकाम की समस्या हो सकती है। इसलिए सायनस की सर्जरी अंतिम उपाय नहीं है।

क्या होते हैं एलर्जी के कारण

नाक की एलर्जी के कई कारण हैं जैसे धूल, धूल के कण, रेशे, दवाइयां, पशु-पक्षियों के पंख, बाल, फफूंद आदि। इनके संपर्क में आने पर नाक में एलर्जी हो जाती है।

- सायनॉसाइटिस बैक्टीरिया, वायरस या फफूंद के संक्रमण से हो सकता है। इसके अलावा नाक में होने वाली गठानें, मस्से इन लक्षणों के कारण हो सकते हैं।

- 'क्रॉनिक सायनॉसाइटिस' में सायनस के द्वार (मुंह) को चौड़ा किया जाता है ताकि मवाद, कफ आसानी से निकल सके।

- नाक में होने वाले मस्सों को निकालने के लिए दूरबीन पद्दति से सर्जरी की जाती है।

- पानी की थैलीनुमा गठानें जिन्हें 'म्यूकोसील' कहते हैं, उन्हें निकालने के लिए सर्जरी की जाती है।

- कैंसर एवं रक्त नली की गठानें निकालने के लिए।

- फंगस के संक्रमण के इलाज के लिए।

- दिमाग से बहने वाले द्रव को रोकने के लिए।

- नाक से होने वाले रक्त स्राव की जांच एवं उपचार।

- आंख की अश्रुग्रंथी में रुकावट

- आंख के पास होने वाले मवाद एवं ट्यूमर्स को निकालने के लिए।

- पिट्‌युटरी ग्रंथी की गठान निकालने के लिए।

- टर्बिनेट बोन को छोटा करने के लिए।

ज्यादातर शल्य चिकित्सा लोकल एनेस्थेसिया से (यानी नाक को सुन्ना कर) की जाती है, परंतु मेडिकल कारणों सेबीमारी अधिक होने पर या लंबे समय तक चलने वाली शल्य क्रियाओं में मरीज को पूर्णतया बेहोश भी किया जाता है। मरीज को एक या दो दिन अस्पताल में रखना पड़ता है। शल्य क्रिया के बाद की चिकित्सा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

क्या है दूरबीन पद्दति

2. 8 से 4 मिलीमीटर गोलाईवाली- दूरबीन को नाक में डालकर उसे कैमरे की सहायता से जोड़ा जाता है एवं टीवी

मॉनिटर पर देखते हुए विशिष्ट उपकरणों की सहायता से नाक एवं सायनस की शल्यक्रिया की जाती है।

- डॉ. माधवी पटेल, नाक, कान, गला विशेषज्ञ, इंदौर

Posted By: Sonal Sharma

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