आज के इस भागदौड़ भरे जीवन में सोशल मीडिया हमारी दिनचर्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। इसके माध्यम से लोग अपने विचारो को सांझा कर नई बौद्धिक दुनिया का निर्माण कर रहे हैं। यहां लोगों को अपने विचारों को व्यक्त करने की स्वंत्रता होती है जो लगभग एक दशक पहले इतना आसान नहीं था। इसने विश्व में संचार को एक नया आयाम दिया है। आज फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूटयूब एवं व्हाट्सएप का उपयोग व्यापक रूप से किया जा रहा है। दुनिया के दूर किसी कोने में बैठे व्यक्ति से संपर्क करना, अपने विचारों को दूसरो तक पहुंचना, देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त करना, ये सब मिनटों में संभव है। सोशल मीडिया उन लोगों की आवाज बना है जो समाज की मुख्यधारा से अलग है एवं जिनकी आवाज को दबाया जाता रहा है। हर साल 30 जून को विश्व भर में सोशल मीडिया दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2010 में की गई।

आंकड़ों की मानें तो वर्तमान में भारत में ही सोशल मीडिया के 350 मिलियन से ज्यादा उपयोगकर्ता हैं और अनुमान लगाया जाए तो 2025 तक ये संख्या 447 मिलियन तक पहुंच जाएगी। दुनियाभर में सोशल मीडिया के 58.4 % यूजर्स हैं। एक रिपोर्ट की मानेंं तो एक व्यक्ति दिन में औसतन 2 घंटे 27 मिनट सोशल मीडिया पर बिताता है। कोरोना महामारी के काल में इसका प्रयोग बहुत हद तक सामने आया जिसने आइसोलेशन में रह रहे लोगों को एक दूसरे से जोड़े रखा। प्रौद्योगिकी की सहायता से कोई भी व्यक्ति बड़ी ही आसानी से प्रभावी व मौलिक कंटेंट आसानी से ऑनलाइन तैयार कर सकता है।

सोशल मीडिया ने आसानी से व्यक्ति को सरकार से जोड़ने का सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने का मौका दिया है। आए दिन हम खबरों में सुनते हैं कि एक आम व्यक्ति अपनी परेशानी रेलवे या अन्य मंत्रालयों को पोस्ट कर देता है जिससे तुरंत ही बड़ी आसानी से समस्या का समाधान भी निकल आता है। सोशल मीडिया किसी भी व्यक्ति के लिए कहीं पर भी मौजूद होते हुए भी अपनी परेशानी अपने विचार साझा करने का सबसे आसान व सरल तरीका बन गया है इसके माध्यम से हम अपनी बात भारत या देश के बाहर भी बड़ी ही आसानी से बिना किसी की मदद के पहुंचा सकते हैं।

वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में सोशल मीडिया का काफी बड़ा योगदान है कोई भी व्यक्ति कहीं पर भी बैठे हैं किसी भी फील्ड की तैयारी सोशल मीडिया की मदद से बड़ी ही आसानी से कर सकता है। देश और विदेशों के बड़े और छोटे संस्थानों को दुनिया के कोने कोने में बैठे विद्यार्थियों को आसानी से सोशल मीडिया के द्वारा ही जुड़ने का मौका मिला है। हालांकि यहां कई बार अनिश्चित प्रकृति, अफवाहों को हवा देना , किसी विशेष एजेंडा को हवा देना, गलत समाचारों को दुनिया भर में फैलाना, चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने एवं लोकतंत्र के मूल्यों से समझौता करने की तरफ भी लेकर जाता है।

सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के कारण भी चर्चा का विषय बना रहता है। सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने व सकारात्मक सोच की जगह समाज को बांटने वाली भी हो गई है। कई प्रकार से इसका नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिला, है एक शोध से पता चलता है कि सोशल मीडिया का ज्यादा प्रयोग हमारे मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालता है व कई बार व्यक्ति डिप्रेशन तक का शिकार हो जाता है।

यह व्यक्ति की कार्यक्षमता पर भी यह असर डालता है। अतः इसमें कोई संदेह नहीं है कि सोशल मीडिया के सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही प्रभाव होते हैं। यह आदमी के विवेक पर निर्भर करता है कि वह इसका उपयोग कितना और किस तरह से करता है। यह पूर्णतयः हम पर निर्भर करता है कि हम किस तरह अपने जीवन में सोशल मीडिया का उपयोग करके बदलाव ला सकते हैं।

अंकिता श्रीवास्‍तव (स्‍वतंत्र लेखिका, मनोविज्ञान और सोशल मीडिया संबंधी मामलों पर लेखनरत)

Posted By: Navodit Saktawat

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