भोपाल: सड़क दुर्घटना या गिरने से हर साल कम से कम दस लाख भारतीयों के जीवन को बचाने में मदद करने के उद्देश्य से स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी, आईओए, एएसएसआई और आईएसआईसी ने 10 अन्य संस्थानों के सहयोग से आज स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के तत्वावधान में पहली बार नेशनल इंजरी प्रिवेंशन वीक का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पूरे भारत के 11 शहरों में किया गया। यह कार्यक्रम चोटों के प्रति जागरूकता, उनका निवारण, रिसर्च और सहयोग निर्माण के उद्देश्य से 7 सितंबर तक जारी रहेगा। इंजरी प्रिवेंशन वीक की पहले दिवस के मौके पर व्हील चेयर स्पोर्ट्स और कल्चरल एक्टिविटी का आयोजन भी किया गया, जिसमें रेस, म्यूजिकल चेयर, लेमन रेस अदि खेल मुख्य रहे

यह बहुत ही अलग और आला पहल है।

इस पहल हिस्सा स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी, इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (IOA), एसोसिएशन ऑफ स्पाइन सर्जन ऑफ इंडिया (ASSI), इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (IAPMR), इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर (ISIC) और इंडियन हेड इंजरी फाउंडेशन (IHIF), चंडीगढ़ स्पाइनल रिहैब, द एसोसिएशन ऑफ पीपल विद डिसएबिलिटी, द स्पाइनल फाउंडेशन, कारा मेडिकल फाउंडेशन, स्पाइन वेलनेस एंड केयर फाउंडेशन, बी ब्रेव और नीना फाउंडेशन हैं। इस कार्यक्रम को विशेष रूप से दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, कटक, पुणे, लखनऊ, हैदराबाद, लखनऊ, पटना और भोपाल से वर्चुयली पार्टिसिपेशन के साथ पूरे भारत में लॉन्च किया गया, इसके बाद इसे दिल्ली में व्हीलचेयर खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम में आयोजित किया गया।

मीडिया को समबोधित करते हुए डॉ एचएस छाबड़ा , प्रेजिडेंट स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी, तत्काल पूर्व प्रेजिडेंट ऐ एस एस आई व डायरेक्टर & चीफ ऑफ़ स्पाइन सर्विसेज इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर ने कहा, “सड़क दुर्घटनाएं और गिरना भारत में चोट के मुख्य कारणों में से हैं। वास्तव में, भारत में दुनिया भर में सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है, जिसमें बड़ी संख्या में 18 से 35 वर्ष के युवा शामिल हैं। 2017 में, भारत में 26,896 वयस्कों की मृत्यु सीट-बेल्ट का उपयोग न करने के कारण हुई। सिर की चोट बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों के लिए मौत का प्रमुख कारण है। चोट की रोकथाम न केवल जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए बल्कि आजीवन आर्थिक बोझ को बचाने के लिए भी महत्वपूर्ण है - अमेरिका में, पैराप्लेजिक्स (शरीर के निचले आधे हिस्से का पूर्ण पक्षाघात) 2 मिलियन अमरीकी डालर का आजीवन आर्थिक बोझ है, जबकि टेट्राप्लाजिक (व्यक्ति) दोनों हाथों और दोनों पैरों में लकवाग्रस्त) 4 मिलियन अमरीकी डालर का बोझ है।

नेशनल इंजरी प्रिवेंशन वीक के अंतर्गत , चोट की रोकथाम के प्रति युवा पीढ़ी को संवेदनशील बनाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में गतिविधियों पर मुख्य ध्यान देने के साथ, पूरे भारत में बाहरी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। विशेषज्ञों ने केंद्र और राज्य स्तरों पर एक एकीकृत बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण के साथ एक व्यापक 'नेशनल इंजरी प्रिवेंशन वीक और कण्ट्रोल कार्यक्रम' को उपयुक्त प्राधिकरण और बजट के साथ एक नोडल एजेंसी की नियुक्ति और चरणबद्ध तरीके से नेशनल इंजरी सुरविलेन्स प्रणाली को मजबूत करने का आह्वान किया है

इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (आईओए) के अध्यक्ष डॉ बी शिव शंकर ने कहा, " इस तरह की पहल करने के लिए इतने सारे संघों को एक साथ आते हुए देखकर मुझे खुशी हो रही है।घायलों की संख्या मृतकों की तुलना में 10 गुना अधिक है और प्राथमिक रोकथाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नेशनल इंजरी प्रिवेंशन वीक कार्यक्रम के तहत, साक्ष्य-आधारित रणनीतियों के आधार पर शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय के लोगों तक पहुंचने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में, सोसायटी लोगों में चोटों को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने और प्रशिक्षण प्रोटोकॉल पर ज्ञान प्रदान करने की दिशा में काम करेगी।"

डॉ शंकर आचार्य, अध्यक्ष एसोसिएशन ऑफ स्पाइन सर्जन ऑफ इंडिया (एएसएसआई) ने कहा, "चोट कहीं भी और किसी को भी लग सकती है। अर्बन माइग्रेशन और शहरों में पर्याप्त बुनियादी ढांचा नहीं होने के कारण, चोटें बढ़ रही हैं। शहरों में अकेले रहने वाले बुजुर्ग विशेष रूप से कमजोर हैं - उनकी मदद के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। चोट की रोकथाम के प्रयासों के एक भाग के रूप में, सरकार को पूर्व-अस्पताल और आपातकालीन देखभाल को मजबूत करना चाहिए, क्षमता निर्माण के साथ-साथ चोट की रोकथाम में अनुसंधान के लिए पर्याप्त धन और संसाधन आवंटित करना चाहिए। नियमों का पालन करने के लिए लोगों की मानसिकता को बदलना भी महत्वपूर्ण है."

ऐसा अनुमान है कि भारत में हर साल सड़क दुर्घटना का शिकार या गिरने से 1 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है और 20 मिलियन लोग सड़क दुर्घटनाओं और गिरने से लगने वाली चोटों के कारण हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं। 7 दिन चलने वाले इस कार्यक्रम का लक्ष्य चोट, बीमारियों और मृत्यु को रोककर नागरिक के स्वास्थ्य में सुधार करना है ताकि जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। कार्यक्रम के आगामी दिनों सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, हॉस्पिटल और डॉक्टरों सहित कई स्टेकहोल्डर शामिल होंगे, और पैनल चर्चा और वेबिनार के लिए नीति निर्माताओं से चर्चा करेंगे। ई-पोस्टर प्रतियोगिता भी होगी । सांस्कृतिक गतिविधियों जैसे ई-प्ले 'टर्निंग पॉइंट' भी होगी। इसके लिए मशहूर रंगमंच हस्तियां डॉली ठाकोर और फरीदून भुजवाला भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। ई-नुक्कड़ नाटक को भी इस कार्यक्रम में आयोजित किया जायेगा।

Posted By: Arvind Dubey