सोरायसिस एक त्वचा रोग है। सोरायसिस संक्रामक लेकिन अनुवांशिक नहीं है। इससे पीड़ित व्यक्ति की अधिकांश त्वचा एक लाल हो जाती है, रूखी-सुखी, फटी त्वचा हो जाती है और खुजली भी होती है। यह बीमारी धीरे-धीरे फैलती है शरीर के एक हिस्से से शुरू होती है। आम तौर पर कोहनी, घुटने और कमर जैसी जगहों पर होती है।सोरायसिस की तकलीफ से गुजर रही महिलाओं के मन में घबराहट और बढ़ जाती है जब वे बच्चे को जन्म देने वाली होती हैं। कई सारी आशंकाएं और अपने साथ होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य की भी चिंता उन्हें घेर लेती है। एक शोध केअनुसार सोरायसिस से ग्रसित करीब 65 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि डिलीवरी के बाद उनकी समस्या और भी बदतर हो गई।

ऐसे में जरूरी है कुछ बिंदुओं को जानना

डिलीवरी के बाद बच्चे की देखभाल, नींद की साइकल का गड़बड़ाना, बच्चे के सारे रूटीन को बनाए रखना, ये सब अपने आप में स्ट्रेस बढ़ा सकता है और स्ट्रेस सोरायसिस के फिर से भड़कने का कारण बन सकता है। इसलिए सबसे पहले गर्भावस्था के दौरान ही अपने डॉक्टर को इस बारे में बताएं और इलाज की सही रूपरेखा बनाएं।

- बच्चे को सुरक्षित स्तनपान करवाने के लिए जरूरी है किस्तनों की पूर्ण सुरक्षा की जाए। क्योंकि इस स्थान पर त्वचा रुखी, पपड़ीदार और दर्दभरी हो सकती है। साथ ही यह बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए डॉक्टर से सलाह लें और सही क्रीम और लोशन का प्रयोग करें। स्तनों को ब्रेस्फीडिंग पिलो जैसी चीजों के साथ सही प्रोटेक्शन दें, यदि स्टेरॉइडयुक्त क्रीम का प्रयोग कर रही हैं तो इसे बच्चे को स्तनपान करवाने के बाद प्रयोग में लाएं और फिर अच्छी तरह धो लें।

- अपने जोड़ों पर नजर रखें और सूजन आने या दर्द और अकड़न होने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर को बताएं। अपने डॉक्टर से फोटोथैरेपी जैसे इलाज के बारे में भी पूछें।

- डीप ब्रीदिंग, ध्यान, अच्छा संगीत जैसी चीजें स्ट्रेस की स्थिति से बाहर लाने में मदद कर सकती हैं। इसके लिए समय निकालें। अपने परिवार और दोस्तों की भी मदद लेने से हिचकिचाएं नहीं, क्योंकि ये आपके ही नहीं बच्चे के भी स्वास्थ्य का मामला है।

Posted By: Sonal Sharma