World Mosquito Day 2019: एक छोटा सा जीव कई जानलेवा बीमारियों को फैलाने में महत्वपूर्ण माना जाता है। अब आम कीटनाशकों से मच्छर नहीं मरते और न भागते हैं क्योंकि उन्होंने कई कीटनाशकों के प्रति अपने जीन्स में बदलाव कर लिए हैं। जिनेटिक म्युटेशन के कारण मच्छरों की कई प्रजातियां मानव समाज के लिए खतरा बन चुकी है।

आज दुनियाभर में हर वर्ग और उम्र के व्यक्ति तक गंभीर और जानलेवा रोगों को पहुंचाने वाला मच्छर खतरे का पर्याय बन चुका है। यहां तक कि अब तो उसके खात्मे के लिए अपनाए जाने वाले साधन भी उस पर कम असर करते हैं। उसके द्वारा फैलाई जा रही बीमारियों के लिए चिकित्सकों को बार-बार दवाइयों के डोज और पोटेंसी बढ़ानी पड़ रही है। आखिर क्या है कारण? कहीं खुद इंसान ही तो नहीं?

बीमारियों के वाहक

मच्छर बीमारियों को मनुष्य तक पहुंचाने के कारक बनते हैं। असल में वे संक्रमण को स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं। और यह इतने बड़े पैमाने पर होता है कि डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) ने भी इन्हें दुनिया के सबसे घातक प्राणियों में माना है। इनके कारण दुनियाभर में हर साल लाखों लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं। आंकड़ों की मानें तो पिछले 30 सालों में डेंगू के मामलों में 30 गुना तक का इजाफा हुआ है। चूंकि दुनिया की आधी से अधिक आबादी ऐसे स्थानों पर रहती है जहां मच्छर मौजूद हैं इसलिए खतरा और भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2050 तक आधी दुनिया मच्छर जनित बीमारियों के जोखिम पर होगी।

ये हैं बीमारियां

मच्छरों से फैलने वाली सबसे आम और सबसे अधिक लोगों को प्रभावित करने वाली बीमारी है मलेरिया। इस बीमारी के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इसके अलावा दूसरा नाम है डेंगू का जिसने पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर अपना आतंक फैलाया है। तीसरा नाम आता है चिकनगुनिया का। इसके अलावा जीका बुखार, लिम्फेटिक फाइलेरियासिस, यलो फीवर तथा जैपनीज इंसिफेलाइटिस भी मच्छर द्वारा फैलाये जाने वाले संक्रमणों में शामिल हैं। गंभीर और घातक प्रभाव तो इन सभी बीमारियों के हो सकते हैं लेकिन इनमें मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया भारत में अधिक आम है। खास बात यह है कि इन बीमारियों को मनुष्यों तक पहुंचाने वाली मादा मच्छर ही होती हैं। इसके पीछे का कारण है गर्भावस्था के दौरान मादा मच्छर को अपने अण्डों के लिए आवश्यक पोषण चाहिए होता है। इस पोषण की पूर्ती के लिए वे मनुष्य का खून अपने डंक द्वारा ग्रहण करती हैं, और बदले में अपनी लार के साथ संक्रमण को स्वस्थ मनुष्य के शरीर के भीतर पहुंचा देती हैं।

संक्रमण के कारक

मच्छरों द्वारा फैलाया जा रहा ये संक्रमण असल में पराजीवी, बैक्टीरिया या वायरस जैसे रूप में होता है। ये वायरस, पराजीवी या बैक्टीरिया मच्छर के काटने पर हमारे रक्त की धारा में पहुंच जाते हैं और फिर शरीर के भीतर पनपने लगते हैं। मच्छर इन बीमारियों को कहीं और से भोजन करने या संक्रमित व्यक्ति का खून ग्रहण करने के दौरान पाते हैं, लेकिन खास बात यह है कि ये वायरस, बैक्टीरिया या पराजीवी आदि मच्छरों का उपयोग सिर्फ आवागमन के साधन के तौर पर करते हैं, अर्थात इनका असर मच्छरों पर नहीं होता

कम होता असर

आजकल अक्सर ये बात सुनने में आती है कि घरों में मच्छर मारने के लिए उपयोग में लाये जा रहे साधन आजकल बेअसर होते जा रहे हैं। इनका असर मच्छरों पर नहीं होता। इसके उलट इनमें मौजूद रसायन इंसानों को ही अस्वस्थ करने लगे हैं। इसके अलावा कई बार डॉक्टर्स भी यह कहते हैं कि इन बीमारियों का स्वरूप अब इस तरह का होता जा रहा है कि दवा की मात्रा और तीव्रता दोनों को बढ़ाना पड़ रहा है। यानी अब इन बीमारियों से निपटने के लिए अधिक शक्ति शाली दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।

ग्लोबल वॉर्मिंग का असर

शोध अध्ययन से यह बात सामने आई है कि इसका एक बड़ा कारण भी हम मनुष्य स्वयं ही हैं। 'नेचर माइक्रोबायोलॉजी जर्नल" में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल वॉर्मिंग,जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण जैसी स्थितियों ने मच्छरों को नए स्थानों पर फैलने में मदद की है। इतना ही नहीं, इन कारणों से मच्छरों के अनुकूलन यानी हैबिटेट में भी परिवर्तन हुआ है और अब उन्होंने अपने रहने के स्थानों की संख्या पहले से कई गुना बढ़ा ली है। इसके साथ ही बदलते वर्षों में मच्छरों की जेनेटिक संरचना और वायरस, बैक्टीरिया आदि में हुए बदलावों ने भी इन बीमारियों के स्वरूप में बदलाव किया है। यही कारण है कि मच्छरों पर अब पुरानी दवाओं या रसायनों का कम असर होता है। मनुष्यों द्वारा वृक्ष काटने, धरती का तापमान बढ़ाने, प्रदूषण फैलाने आदि का एक दुष्परिणाम यह भी सामने आया है कि अब मच्छर हमपर दुगुनी ताकत से हमला कर पा रहे हैं।

लक्षणों पर रखें नजर

मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के लक्षणों में तेज बुखार, कंपकंपी या ठंड लगना, उलटी होना, सिर और बदन दर्द, नॉशिया या उलटी होना, चक्कर आना, त्वचा पर रैशेज होना, आम है। लेकिन इनमें से कुछ लक्षण अन्य बीमारियों के भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि लक्षणों के सामने आते ही तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें।

ऐसे काटते हैं मच्छर

इतने छोटे से शरीर के साथ मच्छर हमें कैसे देखते और हम पर हमला करते हैं, यह एक बहुत ही रोचक सी बात है। यह भी एक सच है कि हममें से ही कई लोग मच्छरों के हमलों के कम शिकार होते हैं और कुछ पर मच्छर ज्यादा ही आक्रमण करते हैं। असल में मच्छर अपनी सूंघने की शक्ति से हमें पकड़ पाते हैं। इसके पीछे वे हमारे शरीर में मौजूद लैक्टिक एसिड, पसीने और कार्बनडाईऑक्साइड के जरिए हमारी ओर आकर्षित होते हैं। यही कारण है कि कुछ लोगों को यह ज्यादा काटते हैं और कुछ को बिलकुल परेशान नहीं करते। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वालों को इनसे अधिक खतरा हो सकता है।

इलाज और वैक्सीन

अच्छी बात यह है कि आज मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के लिए इलाज मौजूद है। लेकिन इनके कारण स्थिति के गंभीर या जानलेवा स्तर तक पहुंचने की नौबत इसलिए आती है क्योंकि लोगों को इनके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। हालांकि इन सभी बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीन नहीं यहीं लेकिन कुछ वैक्सीन मौजूद हैं जो बच्चों को लगाए जा सकते हैं। इन्हें लेकर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। सटीक दवाइयों, भरपूर लिक्विड डाइट आदि से इलाज भी संभव हो सकता है लेकिन इसके लिए मरीज का तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचना बहुत जरूरी है।

बचाव सबसे उत्तम

इलाज की जरूरत पड़ने के पहले ही यदि बचाव के लिए उपाए किए जाएं तो तकलीफ कम हो सकती है। इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प है मच्छरदानी का उपयोग और पूरी बांह के कपड़े पहनना तथा मच्छरों को अपने आस-पास पनपने से रोकने का हर प्रयास करना। इसके अलावा मच्छर रोधी हर्बल क्रीम, लोशन, आदि जैसे साधन व मॉस्किटो रेप्लेंट्स का प्रयोग भी सुरक्षा दे सकता है। यदि आपको लगता है कि आपके आस-पास नमी या गंदगी के कारण मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ रही है तो बड़े पैमाने पर असरदार दवाई का छिड़काव या फॉगिंग भी करवाया जा सकता है।


- डॉ. मनीष शर्मा, सहायक प्राध्यापक, मेडिसिन विभाग, गजराराजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर