Yoga for constipation: योग में अनेक प्रभावी अभ्यास हैं किन्तु सभी खाली पेट किए जाते हैं। वज्रासन ही एकमात्र ऐसा योगाभ्यास है जो भोजन के तुरंत बाद किया जाता है। वज्रासन नाम से ही प्रतीत होता है वज्र के समान अर्थात शक्तिशाली आसन। वज्रासन के अभ्यास से पाचन क्रिया तेज हो जाती है। यह बहुत ही आसान योगाभ्यास है।

कैसे करें वज्रासन

1. योग मैट अथवा दरी पर दोनों पैरो को सामने फैला कर बैठ जाएं।

2. एक-एक पैर को धीरे-धीरे मोड़कर दोनों ऐड़ी के ऊपर नितंब को टिका कर बैठ जाएं।

3. दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलाकर रखें। पैरों के तलवों के ऊपर नितंब रखें।

4. इस अवस्था में कमर व पीठ सीधी रखें।

5. दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखें।

6. इस आसन का अभ्यास समय 5 से 30 मिनट तक हो सकता है।

7. अपने शरीर की क्षमता के अनुसार इस आसन की अवधि को बढ़ा सकते हैं।

वज्रासन को कैसे प्रभावी बनाए

1. यदि वज्रासन करते समय सूर्य स्वर चलता है तो वज्रासन और प्रभावी हो जाता है

2. वज्रासन के दौरान सूर्य स्वर चलाने से शरीर में गर्मी जाती है और यही गर्मी भोजन को पचाने में मदद करती है।

वज्रासन के लाभ

1. पाचन अंगों की ओर रक्त का संचार बढ़ जाता है। पाचनतंत्र से संबंधित सभी स्थानों पर रक्त का संचार बढ़ने से पाचनतंत्र की क्षमता में इजाफा होता है। जिन लोगों का पाचनतंत्र कमजोर है उन्हें इस आसन से फायदा होगा।एसिडिटी और पेट में अल्सर होने की शिकायत पर भी लगाम लगेगी। कब्ज नहीं रहता है और मल ढीला होकर बाहर निकल जाता है।

2. सायटिका नर्व और लोअर बेक पेन के मरीजों को नियमित रूप से वज्रासन करने से इन दोनों व्याधियों से छुटकारा मिल जाता है।

3. शरीर का निचला हिस्सा ज्यादा लचीला हो जाता है साथ ही प्रजनन अंग मजबूती के साथ काम करने लगते हैं। नितंब,जंघा और पिंडली का शेप अच्छा हो जाता है। मूत्र संबंधी विकार एवं जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिल जाता है।

4. मस्तिष्क शांत रहता है और नाड़ियों का तनाव शिथिल हो जाता है।

5. धीमी गति से लयबद्ध श्वास-उच्छवास के जरिएि ध्यानावस्था को हासिल किया जा सकता है।

सावधानी

जिनके घुटने में तकलीफ है, वे वज्रासन का अभ्यास न करे।

- डॉ. जगदीश जोशी, योग एव स्वस्थ जीवन शैली विशेषज्ञ, इंदौर

Posted By: Sonal Sharma

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