निर्मला भुराडि़या

गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में जी मिचलाना और मितली आना, खासकर सुबह-सुबह, एक सामान्य लक्षण है। इसे मॉर्निंग सिकनेस कहा जाता है। इससे समायोजन करने के लिए तरह-तरह के उपाय भी बताए जाते हैं, जैसे सुबह उठते ही बिस्किट जैसा कुछ थोड़ा-सा खा लेना। दिन भर में किसी भी वक्त भारी भोजन करने के बजाए, थोड़ी-थोड़ी देर में, थोड़ा-थोड़ा खाना वगैरह। इस असुविधा को स्त्रियां आराम से निभा ले जाती हैं।

लेकिन हममें से कइयों ने सुना होगा कि फलां बुआ तो गर्भावस्था में पानी तक नहीं पी पाती थीं, उसे भी पहले घूंट में ही उगल देती थीं या फलां दीदी को तो भोजन की सुगंध से ही मितली आती थी। दरअसल कुछ स्त्रियों की तकलीफ मॉर्निंग सिकनेस से काफी गंभीर होती है। मॉर्निंग सिकनेस की तरह सामान्य उपायों से कम भी नहीं होती। गर्भावस्था में मितली और जी मितलाने के इन गंभीर लक्षणों को हाइपरेमेसिस ग्रेविडेरम कहा जाता है।

अक्सर परिवार के लोग समझ नहीं पाते कि यह मॉर्निंग सिकनेस से अलग है, अत: हाइपरेमेसिस की शिकार स्त्रियां घर वालों के तानों की भी शिकार होती हैं मसलन, 'इन्हें तो अनोखा ही होने वाला है", 'अरे हमें भी तो बच्चे हुए थे, हमारा भी जी घबराता था मगर हमने ऐसे नाटक कभी नहीं किए कि रसोई में घुसने से ही इनकार करें' वगैरह।

दरअसल इस समस्या की शिकार गर्भवतियों को तानों की नहीं सहानुभूति, प्यार और देखभाल की जरूरत होती है ताकि वे अपनी तकलीफ हंसते-हंसते सह जाएं। इन्हें बराबर अपने चिकित्सक के भी संपर्क में रहना चाहिए ताकि सुरक्षित समझने पर डॉक्टर इन्हें कोई दवा भी दे सके। गर्भवती, उसके पति और परिवार सभी के लिए जरूरी है कि वे गर्भावस्था के वैज्ञानिक पहलुओं को समझें और तदनुसार गर्भवती महिला की देखभाल करें।

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