अक्सर प्रेग्नेंसी के दौरान यह संशय रहता है कि वर्कआउट किया जाए या नहीं? मगर किसी अन्य की बात पर ध्यान देने के बजाए डॉक्टर से सलाह लेकर एक्सरसाइज की जाए तो यह हर महिला के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा। डॉक्टर हमेशा मेडिकल हिस्ट्री को देखकर आपका सही मार्गदर्शन करते हैं। ऐसा माना जाता है कि रेग्युलर एक्सरसाइज करने वाली महिलाओं को कभी लेबरपेन और प्रेग्नेंसी के बाद की समस्याओं से जूझना नहीं पड़ता है।

अक्सर प्रेग्नेंसी के दौरान यह संशय रहता है कि वर्कआउट किया जाए या नहीं? मगर किसी अन्य की बात पर ध्यान देने के बजाए डॉक्टर से सलाह लेकर एक्सरसाइज की जाए तो यह हर महिला के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा। डॉक्टर हमेशा मेडिकल हिस्ट्री को देखकर आपका सही मार्गदर्शन करते हैं। ऐसा माना जाता है कि रेग्युलर एक्सरसाइज करने वाली महिलाओं को कभी लेबरपेन और प्रेग्नेंसी के बाद की समस्याओं से जूझना नहीं पड़ता है।

1. शोल्डर रोटेशन

कंधों को कुछ समय के लिए उचकाएं और कुछ सेकेंड्स के लिए ऐसे ही रखें और फिर रिलेक्स पोजिशन में ले आएं। इसी तरह पीटी करने की मुद्रा में भी कंधों की एक्सरसाइज की जा सकती है। एक अन्य प्रक्रिया के तहत अपने हाथों की अंगुलियों को कंधों के ऊपर रखते हुए क्लॉक वाइज और एंटीक्लॉक वाइज घुमाइए। इससे कंधों को आराम मिलता है।

2. ब्रीदिंग एक्सरसाइज

गर्भावस्था में ब्रीदिंग एक्सरसाइज सबसे अधिक फायदेमंद होती है। यह न सिर्फ आपको रिलेक्स होने में मदद करती है बल्कि कई मामलों में यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी मदद करती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से डीप ब्रीदिंग सबसे अधिक फायदेमंद होती है। इससे सर्क्युलेटरी सिस्टम बिल्कुल सही रहता है और सूजन की समस्या भी नहीं होती है।

3. नेक एक्सरसाइज

सबसे पहले रिलेक्स्ड पोजिशन में बैठ जाएं। फिर गर्दन को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, दाएं और बाएं तरफ घुमाइए। इससे मूवमेंट सही बना रहता है।

4.पेल्विक टिल्ट

पहले सीधे खड़े हो जाएं फिर अपना बैक पोर्शन दीवार की ओर घुमाते हुए स्पाइन को पूरी तरह से आराम दें। डीप ब्रीथ करते हुए अपनी बैक को दीवार की ओर दबाएं। फिर सांस छोड़िए और फिर इस पूरी प्रक्रिया को दोहराते जाएं। तकरीबन पांच मिनट तक इस तरह की एक्सरसाइज करें। पेल्विक टिल्ट एक्सरसाइज को एक दिन में कई बार किया जा सकता है।

5. सिट एंड साइकल

चेयर पर बैठ जाएं फिर एक पैर को थोड़ा ऊपर उठाकर 20 बार साइकल की तरह चलाएं। ऐसा ही दूसरे पैर के साथ रिपीट करें। यदि चेयर पर बैठने में कोई दिक्कत आए तो मैट या बेड पर लेट जाएं और दोनों पैरों से एयर साइकल चलाएं।

6. वॉल पुश-अप्स

दीवार की तरफ मुंह करके खड़े हो जाएं फिर दीवार के ऊपर दोनों हाथों को ऐसे रखें जैसे दीवार पर दबाव बना रहे हों। यानी हाथों की सही पोजिशन के साथ दीवार के सामने खड़े होकर पुशअप्स करने से पेक्टोरल मसल्स को मजबूती मिलती है।

7. साइड राइसेस

करवट की तरफ से लेटकर एक पैर को ऊपर उठाएं, फिर नीचे लाएं। यही क्रिया दूसरे पैर के साथ भी करें। इससे बॉडी रिलेक्स होती है और पैरों में मजबूती आती है। हमेशा याद रखें कि पानी खूब पीएं क्योंकि इन एक्सरसाइज को करने से पहले शरीर का हाइड्रेट रहना जरूरी है। इसके अलावा अपने डॉक्टर से भी वर्कआउट प्लान के बारे में चर्चा कर लें।

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