Cancer Alert: जितनी जल्दी कैंसर की पहचान होगी और निदान होगा, उतना ही कारगर सिर और गरदन के कैंसर का इलाज संभव है। दुर्भाग्य से पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में इस कैंसर का सरवाइवल रेट बहुत कम है। ग्लोबोकैन 2018 की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश की 24 प्रतिशत आबादी सिर और गर्दन के कैंसर से पीड़ित हैं और हर साल इस कैंसर के 2.75 लाख नए मामले रजिस्टर किए जाते हैं। आईसीएमआर की नेशनल कैंसर रेजिस्ट्री प्रोग्राम के डाटा के अनुसार, देश के तीन कैंसर मामलों में से एक बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ राजस्थान या उत्तर प्रदेश से संबंधित होता है।

इसका मुख्य कारण यह है कि इन प्रदेशों में लोग पान मसाला और तंबाकू का सेवन बहुत ज्यादा करते हैं। फायनल स्टेज भी पहले का इलाज केवल कैंसर और बीमारी को ठीक करने के लिए किया जाता था, जिसके कारण मरीज को अन्य समस्याओं, जैसे टेढ़ा चेहरा, निशान, टेढ़े-मेढ़े दांत, चेहरे के आकार में बदलाव, कंधों में झुकाव आदि से जूझना पड़ता था।

टेक्नोलॉजी में प्रगति के साथ आज मिनमली इनवेसिव सर्जरी के जरिए सिर और कैंसर के चौथे चरण का इलाज भी संभव हो गया है, जिसके परिणाम भी अच्छे होते हैं। ऐसे कैंसरों के इलाज को बेहतर करने के लिए आज देश में ट्रांस-ओरल रोबोटिक सर्जरी (टीओआरएस) भी उपलब्ध है। इस सर्जरी के परिणाम बेहतर होने के साथ ही मरीज का चेहरा भी खराब नहीं होता है और न ही कोई निशान रह जाते हैं। टीओआरएस के साथ मरीजों के सरवाइवल रेट में भी सुधार आया है।

यह है नई टैक्नोलॉजी

ट्रांस-ओरल रोबोटिक सर्जरी एक नई तकनीक है, जो कैंसर कीखतरनाक से खतरनाक सेल्स को भी हटा देता है। रोबोटिक हाथ, बिना कोई चीरा लगाए गर्दन की सभी कैंसर कोशिकाओं को हटा देता है। पहले जुबान के ज्यादा अंदर, यानी कि टॉन्सिल्स तक पहुंचना मुश्किल होता था, लेकिन आज टेक्नोलॉजी में प्रगति के साथ वहां तक पहुंचना भी संभव हो गया है। ये न सिर्फ कैंसर के मरीजों के लिए बल्कि सर्जनों के लिए भी एक वरदान साबित हुई है।

रोबोट से होती है सर्जरी

सर्जरी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को रोबोटिक सिस्टम से कंट्रोल किया जाता है, जिसकी मदद से छोटी से छोटी जगह तक भी आसानी से पहुंच कर इलाज किया जा सकता है। चीरा लगाने की जरूरत न होने के कारण न्यूरोवस्कुलर टिशूज को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है, जिससे मरीजों को निगलने में आसानी होती है और अस्पताल से डिस्चार्ज भी जल्दी कर दिया जाता है। सर्जरी के बाद मरीज की देखभाल का पूरा ख्याल रखा जाता है, जिससे उनमें ब्लीडिंग, इंफेक्शन या कोई और समस्या न हो सके।

टीओआरएस एक एडवांस तकनीक

रोबोटिक सर्जरी होने के कारण कैंसर के इलाज में बदलाव हुए हैं। मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया की मदद से अब ओपन सर्जरीकी जरूरत नहीं पड़ती है। पहले इस प्रकार के कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन देर से निदान के कारण इलाज के परिणाम कुछ खास नहीं होते थे। दुर्भाग्य से, टीओआरएस से पहले सर्जरी पूरी तरह से इनवेसिव (सर्जरी के लिए बड़ा चीरा लगाना पड़ता था) हुआ करती थी। चीरे और काट-पीट के कारण रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के बाद भी मरीजों के चेहरों के आकार खराब हो जाते थे। लेकिन यह मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया 100 फीसदी सुरक्षित है।

जहां पारंपरिक सर्जरी नहीं पहुंच पाती है

ट्रांस-ओरल रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल जुबान, मुंह, गला और सिर व गर्दन के कई अन्य स्थानों के कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है। सर्जिकल उपकरणों में प्रगति के साथ, रोबोटिक टेक्नोलॉजी की मदद से सभी प्रकार के ट्‌यूमर तक पहुंचना संभव हो गया है। टीओआरएस की मदद से सिर और गर्दन के कैंसर का इलाज करना बेहद आसान हो गया है, जिसमें न तो आवाज जाने का खतरा होता है और न ही निगलने में परेशानी होती है। इसके अलावा, इस एडवांस सर्जरी की मदद से मरीज जल्दी ठीक हो जाता है और उसके चेहरे पर कोई निशानभी नहीं रहते हैं। देश के कई डॉक्टर इस विकल्प को पसंद कर रहे हैं।

(डॉ.समीर कौल सीनियर ऑंकोलॉजिस्ट इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली)

Posted By: Arvind Dubey

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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