कोविड के संक्रमण के दौरान वर्ष 2020 में करीब 5.3 करोड़ लोगों को अवसाद से ग्रस्त पाया गया। सहायक शोधकर्ता अलीज फरारी के अनुसार वैश्विक महामारी के दौरान महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक स्तर पर अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। इसी तरह स्कूल और बाहर खेलकूद के सभी साधन बंद होने के कारण बच्चों को भी मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा। उन्हें पढ़ाई-लिखाई में भी बेहद नई परिस्थितियों और दुश्वारियों से दो-चार होना पड़ा है। लेंसट के ताजा शोध में यह पाया गया है कि स्कूली बच्चे महीनों से अपने घरों में बंद होने और अपने मित्रों से नहीं मिल पाने के कारण बोझिल माहौल से ऊब गए हैं और तनावग्रस्त हो चुके हैं। जबकि महिलाओं पर लाकडाउन और कोरोना प्रोटोकाल के बढ़ते दबाव के चलते उनके लिए चारदीवारी के बीच काम का बोझ बढ़ गया है और उन्हें घरेलू हिंसा का भी अधिक सामना करना पड़ा है।

वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते लोगों में तनाव और अवसाद बढ़ गया है। खासकर महिलाओं और स्कूली बच्चों में तनाव अत्यधिक बढ़ा है। आस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार तनाव के 7.6 करोड़ मामले दर्ज हुए हैं। वर्ष 2020 में इससे पहले हुए 48 विभिन्न शोधों में भी 204 देशों में कोरोना की मार का असर सबसे अधिक महिलाओं और बच्चों पर होने की बात साबित हुई है।

Posted By: Navodit Saktawat