हमारे देश में प्रजजन अंगों में टीबी की समस्या के कारण अधिक संख्या में महिलाएं मां बनने सेवंचित रह जाती हैं। इंफर्टिलिटी के 60-70 प्रतिशत केसेस में जिनाइटल टीबी जिम्मेदार मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार जिनाइटल टीबी के 90 प्रतिशत केसेस 15 से 40 साल की उम्र में पकड़ में आते हैं।

इंद्राणी (28) और आशुतोष(30) अर्से से कोशिश कर रहे थे कि उनके परिवार में संतान आ जाए। इंद्राणी को कभी-कभी पेडू में हल्का दर्द रहता था। कभी योनि से खून भी आ जाता था। इन लक्षणों पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। इलाज के अभाव में शरीर की हालत खराब होने लगी और मासिक चक्र भी अनियमित होने लगा। छाती में दर्द के साथ पेडू में दर्द बढ़ने लगा। इतनी समस्याओं के रहते हुए संतानोत्पत्ति संभव ही नहीं थी लेकिन इंद्राणी और आशुतोष इस ओर ध्यान नहीं दे रहे थे। स्त्रीरोग विशेषज्ञ ने जांचों के बाद जब इंद्राणी और आशुतोष को यह बताया कि इंद्राणी को जिनाइटल टीबी की गंभीर शिकायत है तो दोनों सदमे में आ गए। इंद्राणी के युट्रस की लाइनिंग की जांच की सलाह दी गई। जांचों से पता चला की कि निःसंतानता का कारण यह है कि गर्भाशय की अंदरूनी सतह टीबी की बीमारी के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है क्योंकि उस समस्या का समय रहते इलाज नहीं हो सका।

पुरुषों के प्रजनन अंगों में टीबी की वजह से उनका यूरेट्रल पैसेज ब्लॉक हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी हो जाती है जिसे 'एजोस्पर्मिया' कहते हैं। यौन संसर्ग के दौरान ऐसा पुरुष वीर्य स्खलित नहीं कर पाता है क्योंकि उसकी नस ब्लॉक हो जाती है।

ठीक से इलाज हो तो गर्भधारण संभव जिनाइटल टीबी से संक्रमित होने के बाद यदि ठीक से इलाज हो सके तो महिला बाद में गर्भधारण कर सकती है। और अधिक जटिलता से बचने के लिए टीबी का इलाज जितना जल्दी हो सके शुरू करा देना चाहिए। टीबी के इलाज का पूरा कोर्स होना चाहिए। यद्यपि इससे महिला की फिलोपियन ट्‌यूब की रिपेयरिंग हो जाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं है लेकिन टीबी से शरीर मुक्त हो सकेगा। फिलोपियन ट्‌यूब की रिपेयरिंग के लिए सर्जरी की जाती है। इसके बाद भी गर्भधारण न हो तो आईवीएफ तकनीक से गर्भधारण कराया जाता है या इंट्रासायटोप्लाज्मिक इंजेक्शन लगाए जाते ह

महिलाओं को दे सकते हैं संक्रमण यौन संसर्ग के दौरान जिनाइटल टीबी से ग्रसित पुरुष स्वस्थ महिला को संक्रमित कर सकता है। टीबी का रोगाणु एक सायलेंट घुसपैठिए की तरह महिला के शरीर में दाखिल होता है। यही वजह है कि शुरूआती स्टेज में इसके लक्षण सामने नहीं आते हैं। मासिक अनियमित हो जाए और योनि से खून रिसने लगे अथवा यौन संसर्ग के बाद योनि प्रदेश में तेज दर्द हो तो इसे जिनाइटल टीबी के लक्षण मानना चाहिए। इसी तरह पुरुषों में भी वीर्य स्खलन न हो सके और जांच कराने पर मालूम हो कि शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम हो गई हो तो इसे प्रजजन अंगों की टीबी के रूप में पहचानना चाहिए।

गर्भ के लिए जरूरी है यूट्रस की लाइनिंग गर्भाशय (यूट्रस) की अंदरूनी सतह जिसे एंडोमेट्रियम कहा जाता है वह मोटी होना आवश्यक है। स्वस्थ और हैल्दी एंडोमेट्रियम हैल्दी पीरियड्‌स की सायकल और प्रेग्नेंसी के लिए जरूरी मानी जाती है। प्रजनन अंगों की टीबी होने पर इलाज जितना जल्दी हो सकेगा उतने ही महिला के मां बनने के चांसेस बढ़ते हैं। इलाज जल्दी होने से गर्भाशय की अंदरूनी सतह को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है।

-डॉ.अमर कारिया आईवीएफ एक्सपर्ट, भोपाल