नई दिल्ली। अगर मां आंखों के इलाज की दवा ले रही हो, तो इससे दूध पीते बच्चे की सेहत को नुकसान हो सकता है। हालिया शोध के बाद वैज्ञानिकों ने बताया कि रेटिना से संबंधित कई बीमारियों के लिए इलाज में रेनीबिजुमैब और एफ्लीबरसेप्ट दवाओं का इस्तेमाल होता है। इनमें एंटी-वस्कुलर एंडोथेलियल ग्रोथ फैक्टर (एंटी-वीईजीएफ) एजेंट होता है।

वीईजीएफ रक्त नलिकाओं के विकास में भूमिका निभाने वाला एक प्रोटीन है, लेकिन रेटिना से जुड़ी कई बीमारियों में भी इसकी भूमिका रहती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे में अगर मां एंटी-वीईजीएफ दवा का सेवन करती है, तो इस बात की आशंका बढ़ जाती है कि दवा उसके दूध में पहुंचकर वहां भी वीईजीएफ प्रोटीन को निष्क्रिय कर दे। ऐसा होना बच्चे की सेहत पर भारी पड़ सकता है।

व्यायाम से पार्किंसन के मरीजों को हो सकता है फायदा

  • दवा के साथ-साथ नियमित तौर पर व्यायाम करना पार्किंसन के मरीजों को फायदा पहुंचा सकता है। विज्ञान पत्रिका 'द लैंसेट न्यूरोलॉजी' में प्रकाशित शोध में यह निष्कर्ष दिया गया है।
  • पार्किंसन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) से संबंधित बीमारी है। इस बीमारी में व्यक्ति के हाथ-पैर कांपने लगते हैं और उसे संतुलन बनाने में मुश्किल आती है।
  • अध्ययन के दौरान पार्किंसन के मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। इसमें से एक समूह को हफ्ते में कम से कम तीन बार 30-45 मिनट तक घर पर साइकिलिंग करने को कहा गया। इस दौरान उनके सामने चुनौतियां भी रखी जाती थीं और चुनौतियां पार करने पर पुरस्कृत भी किया जाता था।
  • अध्ययन के बाद पाया गया कि जिस समूह ने साइकिलिंग की, उनके दिल की सेहत और तंत्रिका तंत्र की हालत अन्य से बेहतर रही। वैज्ञानिकों ने कहा कि इस प्रक्रिया की सबसे अच्छी बात है कि इसे घर में रहते हुए ही आजमाया जा सकता है। - एएनआइ

Posted By: Arvind Dubey

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