Health Alert: त्वचा की रंगत और उसका टेक्स्चर बहुत कुछ कह देता है। रोगी की त्वचा स्वस्थ इंसान की त्वचा से अलग दिखाई देती है। इसी तरह यदि कैंसर का रोग शरीर में प्रवेश कर चुका हो तब भी त्वचा अलग ही रंग की हो जाती है। त्वचा के बदलते स्वरूप को पहचानकर कैंसर की गठान का समय रहते पता लगाया जा सकता है। यह जांच स्थिति, स्त्री एवं पुरुष दोनों के लिए है। इस स्वयं परीक्षण अथवा किसी की सहायता से किए गए परीक्षण में त्वचा पर उपस्थित कुछ निशानों को पहचानना चाहिए। इसके लिए महीने की किसी भी एक सुनिश्चित तारीख को परिवार के किसी सदस्य की मदद से त्वचा में उपस्थित होने वाले किसी भी लाल, काले, नीले या कत्थई रंग के दाग धब्बे को देखने का प्रयास करें जो आपकी पीठ पर, हाथों में, जननांगों के आसपास या आंखों के नीचे उपस्थित हो सकते हैं।

त्वचा के इस बदलते स्वरूप के जरिए शरीर के भीतर के कैंसर को पकड़ा जा सकता है। शरीर की इस अद्भुत भाषा को चिकित्सा विज्ञान के त्वचा पर उपस्थित होने वाले लक्षणों के नाम से पहचाना जाता है। त्वचा का कैंसर मिलेनोमा और अन्य कैंसर इस तरह के और असामान्य और निकट भविष्य में पैदा हुए पहली बार देखे जाने वाले मस्से, तिल, भंवरी, लहसुन जैसे त्वचा के निशानों को देखना और पहचानना चाहिए। शरीर के जिस हिस्से को आप नहीं देख सकते हैं वह हिस्सा किसी व्यक्ति की मदद से या शीशे के सामने खड़े होकर परखा जा सकता है।

स्वयं परीक्षण को दें प्राथमिकता

  • स्त्री एवं पुरुष दोनों को महीने की 1 तारीख को अपने दोनों हाथों से शरीर की त्वचा में हाथ फेरते हुए कहीं कोई गठान सूजन आदि को महसूस कर पहचानने का प्रयास करना चाहिए। खासतौर से गर्दन के क्षेत्र में जहां 300 लिंफ ग्रंथियां या गठानें मात्र गर्दन में उपस्थित होती हैं जो शरीर की भाषा और रोग की स्थिति को बताने का कार्य करती है।
  • इनमें से यह गठानें बच्चों में खासतौर से फेफड़ों के संक्रमण खांसी या टीवी के संक्रमण जैसी बीमारियों के निदान में अति सहायक होती हैं, लेकिन गर्दन के बाएं हिस्से में यदि एक तरह की गठान मिले तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए जो करीब करीब 7 या 8 तरह के शरीर के भीतर होने वाले कैंसर की पहचान कराने में अति मददगार सिद्ध होती है।

(डॉ. अनिल भदौरिया, जनरल फिजीशियन कर्मचारी राज्य बीमायोजना अस्पताल देवास )

Posted By: Arvind Dubey