Health Alert: अगर आप किसी ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां की हवा बहुत दूषित है तो संभल जाइये। इस वायु प्रदूषण का आपकी सेहत पर तो बुरा असर पड़ने ही वाला है, आपके घर के बच्‍चों के लिए यह बहुत खतरनाक है। वायु प्रदूषण वातावरण में ऐसे पदार्थों की उपस्थिति के कारण वायु का प्रदूषण है जो मनुष्यों और अन्य जीवित प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, या जलवायु या सामग्री को नुकसान पहुंचाते हैं। वायु प्रदूषक कई प्रकार के होते हैं, जैसे गैस, कण और जैविक अणु। लेकिन अब यह प्रदूषण बीमारियों को दावत दे रहा है। विज्ञानियों ने एक हालिया अध्ययन में दावा किया है कि थोड़े समय के लिए भी प्रदूषित हवा के बीच रहने से आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर (एएसडी) पीड़ित बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बढ़ जाता है। बीएमजे ओपन नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन निष्कर्ष में पाया गया कि प्रदूषित वायु से बचाकर बच्चों को अतिसक्रियता, आक्रामकता या खुद को चोटिल करने जैसी परिस्थितियों से रोका जा सकता है।

क्‍या है आटिज्‍म की बीमारी

आटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है, जिसके लक्षणों व गंभीरता की एक लंबी श्रृंखला होती है। इसमें अक्सर तंत्रिकाओं में सूजन आ जाती है। कई बार ड्रग्स, सप्लीमेंट््‌स व खानपान के कारण सिस्टमेटिक इनफ्लेमेशन का खतरा बढ़ जाता है। सिस्टमेटिक इनफ्लेमेशन तब पैदा होता है, जब प्रतिरक्षा प्रणाली लंबे समय तक लगातार शरीर के बचाव के लिए सक्रिय रहती है।

शोध में अहम आंकड़े

सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी हास्पिटल, दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं ने वर्ष 2011 से 2015 के बीच अस्पताल में भर्ती पांच से 14 वर्ष के आटिज्म पीड़ित मरीजों के आधिकारिक आंकड़े का इस्तेमाल किया। उन्होंने दक्षिण कोरिया के सभी 16 क्षेत्रों के पार्टिकुलैट मैटर (पीएम 2.5), नाइट्रोजन डाई आक्साइड (एनओ2) व ओजोन (ओ3) स्तर से संबंधित छह दिनों के आंकड़े भी हासिल किए। विश्लेषण के दौरान शोधार्थियों ने पाया कि रोजाना अस्पताल में भर्ती होने वाले आटिज्म पीड़ित बच्चों की औसत संख्या 8.5 रही। इनमें लड़कों की औसत संख्या सात व लड़कियों की 1.6 रही।

Posted By:

  • Font Size
  • Close