बदलते समय के साथ यह सफेद और मीठी चीज मनुष्य के लिए शत्रु की तरह बनती जा रही है। हालांकि सफेद शकर के मीठे की पूरी मात्रा को भोजन से हटा देना स्वास्थ्य पर अच्छा असर नहीं डालता। लेकिन लोग मीठे से पूरी तरह बचना चाहते हैं। शुगर डिटॉक्स का सहारा ऐसी ही स्थिति में लिया जाता है।

शुगर डिटॉक्स का असल मतलब है एक प्रकार की विशेष डाइट को फॉलो करना। यह डाइट शकर की विशेष भूख यानी क्रेविंग को नियंत्रित करने और वजन कम करने में मदद करती है। लेकिन क्या यह डाइट हर तरह से कारगर होती है, या फिर शकर की मात्रा को नियंत्रित करने में और कोई चीज मदद कर सकती है? जानिए इससे जुड़े कुछ तथ्य-

दिमाग के लिए पुरस्कार है शकर

दिमाग शकर को एक पुरस्कार की तरह लेता है। जब आप अक्सर काफी मात्रा में शकर खाते हैं तो इस पुरस्कार के एहसास को और ब़ढा देते हैं, ऐसे में इस लत से छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है।

जब आप एक शकर से भरी चीज खाते हैं तो इसमें मौजूद शकर यानी सामान्य कार्बोहाइड्रेट्‌स आपके खून में पहुंचकर तुरंत ग्लूकोज में बदल जाते हैं और खून का शुगर लेवल झटके से बढ़ जाता है। ये सामान्य कार्बोहाइड्रेट्‌स फल, सब्जियों और डेयरी उत्पादों में भी मिलते हैं लेकिन चूंकि इन चीजों फाइबर और प्रोटीन भी होता है, इसलिए ये ग्लूकोज बनाने की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। जबकि सोडा, सॉफ्टड्रिंक्स, कोल्डड्रिंक्स, शुगर सिरप आदि ऐसा नहीं करते। स्टार्चयुक्त पदार्थ भी इसी तरह शुगर का स्तर बढ़ाते हैं।

इस ग्लूकोज को शरीर की हर कोशिका तक पहुंचाने के लिए आपकी पैंक्रियास एक हार्मोन इन्सुलिन पैदा करती है। परिणामस्वरूप खून में शकर की मात्रा एकदम से कम होती है तथा व्यक्ति और अधिक शकर की तलाश करने लगता है। ताकि फिर से पहले जैसी उपहार वाली आनंद की अनुभूति कर सके। इन्सुलिन का असंतुलन ही डायबिटीज जैसी स्थितियों को भी पैदा करता है।

कुछ शुगर डिटॉक्स प्लान भोजन में से शकर को पूरी तरह हटा देते हैं। और लिक्विड को मुख्य डाइट बना देते हैं। मतलब ये फल, सब्जियों, डेयरी उत्पादों और रिफाइंड अनाज को खाने पर भी रोक लगा देते हैं। ऐसे में दो समस्याएं हो सकती हैं। पहली यह कि शरीर में शकर की कमी से दिक्कत पैदा हो सकती है। इससे कैल्शियम, विटामिन्स और फाइबर जैसी जरूरी चीजें शरीर को नहीं मिल पातीं। और दूसरे कुछ दिनों की रोक के बाद आप फिर से ढेर सारी शकर खाने की आदत की ओर लौट सकते हैं। डायबिटिक, हाई बीपी या अधिक वजन वाले लोगों को तो ऐसी डाइट से बिलकुल दूर रहना चाहिए, वरना स्थिति गंभीर हो सकती है।

अपनाएं यह तरीका

  • धीरे-धीरे शकर की आदत को कम करें। हर हफ्ते एक छोटी सी सीमा बनाएं। जैसे एक हफ्ते मिठाई को कम से कम करें, अगले हफ्ते अपने दूध, चाय, कॉफी आदि में कम से कम शकर डालना शुरू करें, कुकीज की जगह फल, योगर्ट आदि जैसी चीजों का उपयोग अधिक करें।
  • डायरेक्ट शुगर लेने से बचें। ऐसा करते-करते धीरे-धीरे आपकी शकर की आदत कम होती जाएगी।
  • पूरी तरह शकर के उपयोग को खत्म करने की बजाय हाई फाइबर और प्रोटीन वाले खाद्य को चुनें, इससे पेट लम्बे समय तक भरा रहेगा और बेवजह खाने की आदत से आप बच पाएंगे।
  • उदाहरण के लिए खूब सारी सब्जियां डालकर दलिया बनाएं, बजाय मीठा दलिया खाने के। इसके अलावा पैक्ड और डब्बाबंद खाद्य, सॉस, कैचअप, सलाद ड्रेसिंग या एक्स्ट्रा क्रीम वाली चीजों के सेवन से दूरी बनाएं। इन चीजों में शकर की मात्रा स्पष्ट दिखाई नहीं देती लेकिन तकलीफ देने वाली हो सकती है।
  • नियमित व्यायाम और फिजिकल एक्टिविटी को भी जीवन का हिस्सा बना लें। आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल भी कम से कम करें। ये भले ही आपके मन को इस बात की राहत देते हों कि आप आप कम शकर खा रहे हैं, लेकिन असल में ऐसा होता नहीं।
  • यदि डिटॉक्स डाइट अपनानी भी हो तो जो भी खाएं उसमें भरपूर पोषण का संतुलन बनाएं। मतलब दिनभर में आपको जितनी कैलोरीज चाहिए उतनी आपके स्वस्थ भोजन से आनी चाहिए। यदि इसमें जरा सा भी असमंजस हो तो विशेषज्ञ से परामर्श लें।