Health News: हमारा हृदय एक इंजन की तरह काम करता है। जिस तरह इंजन के बिना गाड़ी आगे नहीं बढ़ती उसी तरह हृदय में गड़बड़ी आने पर हमारा शरीर आगे नहीं बढ़ सकता। जिस तरह इंजन की गति और लय का निर्धारण स्पार्क-प्लग करता है उसी तरह हमारे हृदय की गति और लय का निर्धारण कार्डिएक कन्डकशन सिस्टम करता है। इस सिस्टम में कवि गड़बड़ी आने पर हृदय की गति अत्यधिक कम, अत्यधिक ज़्यादा या अनियमित हो जाती है। कभी कभी ऐसी स्थिति जानलेवा भी हो सकती है, जिससे सडन कार्डिएक अरेस्ट कहते हैं।

पिछले दो दशकों की मेडिकल साइंस अर्थात चिकित्सा विज्ञान की उन्नत प्रगति की वजह से हम हृदय संबंधित रोगों को और ज़्यादा अच्छी तरह समझ सके हैं और उनके निदान और निवारण में आगे बढ़े हैं। इस उन्नति में, मैं कार्डिएक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी का विशेष रूप से उल्लेख करूँगा क्योंकि इसके उपयोग से वे बीमारियां जो लाइलाज समझी जाती थीं, आज संभवतः सम्पूर्ण इलाज योग्य हो सकी हैं। इसके माध्यम से हम हृदय में धड़कन से संबंधित बीमारियों की जाँच करते हैं और सही इलाज का चुनाव करते हैं। हृदय की धड़कन संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी अबलेशन, पेसमेकर या दवाई के द्वारा उपचार होता है। कौनसा इलाज किस मरीज़ के लिए उपयुक्त है ये सवाल इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट के परामर्श से सुलझाया जा सकता है। रेडियोफ्रीक्वेंसी अबलेशन के माध्यम से हृदय की बढ़ने वाली गति की समस्याओं का निवारण करते हैं पेसमेकर लगाकर हम हृदय की कम गति या बहुत अत्यधिक गति जैसी जानलेवा बीमारियों का इलाज करते हैं।

डॉ अनिरुद्ध व्यास

हृदय रोग विशेषज्ञ

(पेसमेकर, हार्ट फैलियर, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी) विशेष जूपिटर हॉस्पिटल इंदौर

Posted By: Arvind Dubey

  • Font Size
  • Close