Health News: कोरोना महामारी का घातक रूप हम सभी देख चुके हैं। दूसरी लहर ने तो देश व दुनिया में मौत का तांडव कर दिया था। उसके बाद कोरोना की वैक्‍सीन मानो जीवनदान के रूप में सामने आई और कहना न होगा कि वैक्‍सीन की बदौलत ही तीसरी व चौथी लहर आने के बाद भी हाहाकार नहीं मचा है। यानी कोरोना की वैक्‍सीन अपने आप में बहुत कारगर है। अब इसे लेकर एक नया शोध सामने आया है। इसमें बताया गया कि किस उम्र के लोगों के लिए कोरोना की वैक्‍सीन क्‍या असर करती है।

कोराना वैक्सीन को लेकर इसके बनने के बाद से ही तरह-तरह की भ्रांतियां रही हैं। कई दूरदराज के इलाकों में तो लोगों के मरने तक की अफवाहें फैलीं। लेकिन इसके बाद जब एक बार लोगों का विश्वास जमा तो केंद्रों पर भीड़ लगने लगी। इस दौरान कई तरह के अध्ययन भी विभिन्न दावों को लेकर सामने आते रहे। इसी तरह अभी हाल में लैंसेट के एक अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरोना वैक्सीन सभी भार वर्ग के लोगों में समान रूप से प्रभावी है।

लैंसेट डायबिटीज एंड इंडोक्रिनोलाजी में शुक्रवार को प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि कोरोना वैक्सीन हायर बाडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) और भारी वजन वाले लोगों में जितना कारगर है उतना ही उससे कम भार वाले लोगों को भी सुरक्षित करती है। अध्ययन का नेतृत्व करने वाले आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लेखक कारमेन पीअर्नास ने बताया कि अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि वैक्सीन संक्रमित लोगों में गंभीर बीमारी के खतरे को भी कम करती है।

ऐसे किया गया यह अध्‍ययन

शोधकर्ताओं ने इंग्लैंड के 91 लाख लोगों को अपने अध्ययन में शामिल किया, जिनकी उम्र 18 वर्ष से ऊपर थी और जो इसके पहले संक्रमित नहीं हुए थे। इन्हें बीएमआइ के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा के अनुसार चार वर्गों में विभाजित कर अध्ययन किया गया। विश्लेषण में उम्र, लिंग, स्मोकिंग स्टेटस और अन्य सामाजिक आधार पर भी विभाजन किया गया।

अध्ययनकर्ताओं ने हर ग्रुप के वैक्सीन लगवाने और न लगवाने वालों के बीच तुलना की। यह अध्ययन आठ दिसंबर 2020 से 17 नवंबर 2021 के बीच किया गया। इसमें अगर भारी वजन वाले लोगों की तुलना देखें तो वैक्सीन न लगवाने वालों की अपेक्षा वैक्सीन लगवाने वालों की मृत्यु दर दो तिहाई कम पाई गई।

Posted By: Navodit Saktawat

  • Font Size
  • Close