बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। योग अभ्यास में प्रतिदिन वृक्षासन कर रीढ़ की हड्डी को मजबूत किया जा सकता है। इसके अलावा पैर, हाथ की हड्डी पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस अभ्यास को रोजाना करने से शरीर रोग मुक्त होता है। शरीर से लेकर पैर तक रक्त संचार व आक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है।

योग विशेषज्ञों ने बताया

वृक्षासन करने के लिए दोनों पांव व हाथ मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं। दायां पांव घुटने से मोड़ते हुए दाएं पांव की एड़ी को बायीं जांघ के मूल में रखें। पांव को मोड़ने के लिए हाथों का सहारा ले सकते हैं। दोनों हाथ कंधे के बराबर ऊंचाई पर फैलाकर हथेलियों को उपर उठाकर आसमान की ओर करें। हाथों को सिर के ऊपर सीधे रखते हुए नमस्कार की मुद्रा में मिला लें। शरीर को स्थिर रखने के लिए श्वास को नियंत्रित करते हुए आंख की नजर को बिंदू पर स्थिर करें। क्षमतानुसार आसन रोकने का समय बढ़ाते रहे। इससे शरीर के संतुलन में स्थिरता आएगी।

फिर वापस सामान्य स्थिति पर आने के लिए उन्‍हीं स्टेप्स को दोहराएं। अब इसी अभ्यास को दूसरे पांव से दोहराएं। यह अभ्यास मानसिक एकागरता के लिए बहुत उपयोगी है। शरीर में लचक बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा है। पांवों की मांसपेशियों को मजबूत करता है। रीढ़ व पेट को स्वस्थ रखता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभ्यास करने के लिए सावधानी भी जरूरी है।

सामान्य तौर पर वृक्षासन का अभ्यास हर तरह से सुरक्षित है और इसका अभ्यास हर कोई कर सकता है, लेकिन अगर उच्‍च रक्तचाप की समस्या है तो माडरेशन में ही वृक्षासन का अभ्यास करें और अभ्यास के दौरान हाथों को छाती के पास ही रखें। इन्हें सिर के ऊपर ना उठाएं। यदि वर्टिगो या माइग्रेन की समस्या है, तो भी इस आसन को करने से बचें।

Posted By: Manoj Kumar Tiwari

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