Right Doctor for Child । शिशु को जन्म देना हर मां के लिए एक खूबसूरत क्षण की तरह होता है। शिशु के जीवन में आते ही हर मां अपने बच्चे को लेकर सपने बुनती है। सर्दियों के मौसम में बच्चों की तबीयत ज्यादा खराब होती है और ऐसे में मां अपने बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित रहती है। डॉक्टर भी शिशु की सही देखभाल में काफी मददगार होते हैं। बच्चे का डॉक्टर भी उनकी हर छोटी से बड़ी बातों का ख्याल रखने के लिए कहते हैं। साथ ही टीकाकरण और सही दवाओं का चयन भी करते हैं। आइए जानते हैं कि अपने शिशु के सही चिकित्सक को चुनने के लिए किन बातों को ध्यान में रखा जाए-

घर के पास होना चाहिए डॉक्टर

नवजात शिशु तो उसकी तबीयत सर्दी में खराब होना एक सामान्य बात हैं। इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चे का चिकित्सक घर के नजदीक हो ताकि शिशु को कुछ भी होने पर तुरंत दिखाया जा सके। यह पता कर लें कि डॉक्टर का क्लीनिक कहां है और उसके खुलने का क्या समय है। साथ ही वहां का फोन नंबर भी नोट करें ताकि कोई इमरजेंसी होने पर तुरंत संपर्क कर सकें।

हेल्थ इंश्योरेंस कवर करता है या नहीं

यह भी पता कर लें कि जिस डॉक्टर से आप इलाज करवा रहे हैं क्या वे स्वास्थ्य बीमा योजना को स्वीकार करते हैं। शिशु के लिए ऐसे डॉक्टर का चुनाव करें, जिससे विचार मिलते हो। अर्थात डॉक्टर शिशु से संबंधित माता-पिता के हर सवाल के जवाब देने में समर्थ हो।

गर्भवती है तो पहले से ही कर लें सही डॉक्टर का चुनाव

प्रसव से पहले ही शिशु के डॉक्टर का चुनाव करने से सुविधा रहेगी, इसलिए जब डिलीवरी होने वाली है, उसके पहले ही अपने शिशु के लिए सही चिकित्सक चुन लें। शिशु को किसी भी डॉक्टर को दिखाने से पहले किसी और से भी परामर्श ले लें कि कौन से चिकित्सक उनके शिशु के लिए अच्छे रहेंगे। अपने परिचित से भी इस बारे में जानकारी ले सकते हैं। यदि किसी परिचित ने अपने शिशु का पहले से किसी चिकित्सक से इलाज कराया हो तो उनके अनुभव से भी चिकित्सक के चुनाव में आसानी होगी।

प्रसव के बाद चिकित्सक रखते हैं इन बातों का ध्यान

-शिशु का चिकित्सक प्रसव के बाद अस्पताल में शिशु को देखने के लिए आएंगे। जब तक शिशु का चिकित्सक इसकी पूरी जांच ना कर ले, तब तक शिशु को घर नहीं ले जा सकेंगे। शिशु की पहली जांच कराने संबंधी अन्य निर्देशों के साथ ही घर भेजा जा सकेगा।

- बच्चे का डॉक्टर रोग के संकेतों और बच्चे के विकास से संबंधित समस्याओं की पूरी तरह से जांच करेंगे। इसके साथ ही शिशु को कौन सा टीका दिया जाना है, यह भी सुनिश्चित करेंगे।

-इसके अतिरिक्त स्वस्थ बच्चे की जांच, शिशु के वजन, ऊंचाई और सिर के आकार की जांच की जाती है।

-शिशु के व्यवहार के संबंध में प्रश्न पूछा जा सकता है और साथ ही शिशु का पूरी तरह से परीक्षण किया जाता है। नवजात बच्चे की गतिविधियों के आधार पर ही डॉक्टर सही सलाह दे सकता है कि बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास कैसे चल रहा है।

-शिशु की देखभाल में उसके खान संबंधित बातों के बारे में डॉक्टर सलाह देंगे। अगली बार बच्चे को कब दिखाना है, इसके बारे में भी डॉक्टर समय समय पर सलाह देंगे।

Posted By: Sandeep Chourey

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