Sinus Problem: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बदलते मौसम में अक्सर लोगों को सर्दी-जुकाम हो जाता है। कई बार लोग इसे अन्यथा लेते हैं पर यह तरीका हर बार सही नहीं है। कई बार लोग यह भी कहते हैं कि साइनस की परेशानी है। इसके चलते वे तरह-तरह की दवाई अपने विवेक से ही लेते रहते हैं और चिकित्सकीय परामर्श नहीं लेते। परिणाम यह होता है कि समस्या कम होने की बजाए बढ़ जाती है।

डा. विजय चौरड़िया के अनुसार इस बदलते मौसम में संक्रमण से बचने के लिए शरीर को गर्म रखना जरूरी है और इसके साथ ही आराम भी आवश्यक है। जब शरीर में ऊष्णता रहेगी तो उस ऊर्जा का इस्तेमाल शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के बजाए बैक्टेरिया से लड़ने में होगा। शरीर को ऊष्ण रखने के लिए गर्म तासिर वाले पदार्थों का सेवन संतुलित मात्रा में करें। दवाई युक्त पानी की भाप भी तब ही लें जब सर्दी होने पर नाक ज्यादा बहे या उससे परेशानी हो। सामान्य पानी से भाप लेना भी लाभकारी होता है। दवाई डालकर भाप लेने से पहले भी चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

जहां तक बात साइनस की है तो नाक के आसपास चेहरे में हवा भरी गुहाएं होती हैं। इन गुहाओं का कार्य नाक के भीतर आने वाली हवाओं की एयर कंडीशनिंग करना होता है। इस कार्य के लिए साइनस का होना जरूरी है। यदि नाक के छिद्रों में व्यवधान होगा तो साइनस में संक्रमण की वजह से किटाणू या फंगस हो जाएगी। यदि संक्रमण नाक से साइनस में पहुंच जाए तो उसे साइनोसाइटिस्ट कहते हैं। साइनोसाइटिस्ट यदि अधिक दिनों तक रहे तो समस्या बढ़ सकती है।

वास्तव में साइनस का होना समस्या नहीं यह तो बनावट है। इसमें संक्रमण का होना समस्या की वजह है। 3 से 4 दिन में भी यदि सर्दी-जुकाम ठीक न हो तो नाक, कान, गला विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। कई बार कान में दर्द, गले की समस्या की वजह भी साइनस से जुड़े कारण हो सकते हैं। कान में तकलीफ होने डाक्टरी सलाह के बिना किसी भी तरह की दवा या तेल डालना समस्या को और भी बढ़ा सकता है।

Posted By: Sameer Deshpande

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