जरूरी पोषक तत्वों के सेवन को लेकर अक्सर हम तब तक ध्यान नहीं देते जब तक कि इनकी कमी से कोई बड़ी समस्या खड़ी हो जाए। नियासिन जैसे पोषक तत्व की कमी से होने वाली परेशानियां कुछ इसी प्रकार की होती हैं। इसलिए समय रहते इन पर ध्यान देना आवश्यक है।

नियमित हो सेवन

स्वास्थ्य के लिए इस पोषक तत्व की भी निश्चित मात्रा का सेवन आवश्यक है। इसमें बच्चों के लिए उम्र के अनुसार 2-16 मिग्रा प्रतिदिन, पुरुषों हेतु 16, महिलाओं के लिए 14, गर्भवती स्त्रियों के लिए 18 तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए 17 मिग्रा प्रतिदिन की मात्रा सुझाई जाती है। खाद्य के तौर पर इसे हरी सब्जियों, अंडे, मछली, सीरियल्स, लेग्युम्स, मूंगफली, टमाटर, खजूर, एवाकाडो, ब्रोकली, गाजर, मशरूम्स, तोफ़ु आदि से पाया जा सकता है। इसके अलावा सप्लीमेंट के तौर पर भी चिकित्सक की सलाह से इसे अपनाया जा सकता है।

नियासीन मतलब विटामिन

एक तरह का जैविक घटक नियासीन, विटामिन बी 3 या निकोटिनिक एसिड के रूप में भी पहचाना जाता है। इसकी कमी से तो समस्याएं उपजती ही हैं। यह एक ऐसा सहायक तत्व है जिसकी एक निश्चित मात्रा का उपयोग कुछ विशेष औषधियों में भी किया जाता है जिसमें हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाइयां भी शामिल हैं। शोध बताते हैं कि नियासिन का प्रयोग गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को नीचे लाता है। इससे कार्डियोवेस्क्यूलर हेल्थ को भी अच्छा बनाने में मदद मिल सकती है।

सेकेंड अटैक से बचाव में सहायक

रिसर्च यह भी कहती हैं कि कई मामलों में नियासिन के प्रयोग से एथ्रोस्क्लेरोसिस और धमनियों के कड़क होने जैसी समस्याओं में भी राहत मिलने के प्रमाण मिले हैं। वहीं ऐसे लोग जो एक बार हार्ट अटैक से गुजर चुके हैं उनमें इसके प्रयोग से दूसरे अटैक के आने की आशंका का प्रतिशत कम हुआ है।

कमी से होने वाली परेशानियां

यदि पर्याप्त मात्रा में नियासिन का सेवन न किया जाए तो कई सारी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यही नहीं यदि किसी व्यक्ति का शरीर इस पोषक तत्व को ठीक से अवशोषित न कर पाए तो भी तकलीफ हो सकती है। इन तकलीफों में मुख्य हैं-

  • पलैग्रा, यह इस विटामिन की पर्याप्त मात्रा का सेवन न करने से होने वाली गंभीर बीमारी है, जिसमें त्वचा पर मोटे, पपड़ीदार रैशेज जो विशेषकर सूरज की रोशनी में और उभर आते हैं, जुबान लाल हो जाती है और मुंह में सूजन आ जाती है तथा उल्टी और दस्त के साथ ही सिरदर्द और थकान भी हो सकती है। यही नहीं इसके चलते नर्वस सिस्टम पर भी बुरा असर पड़ता है और डिप्रेशन और याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं भी घेर सकती हैं। यदि इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
  • सेवन के अलावा नियासिन के शरीर में अवशोषित न हो पाने के कारण भी स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसका कारण शराब का अधिक सेवन, पाचन तंत्र से जुड़ा डिसऑर्डर हो सकता है।
  • नियासिन की कमी से पाचनतंत्र पर भी बुरा असर पड़ सकता है और इस तंत्र से जुड़ी कई तकलीफें हो सकती हैं।

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