विज्ञानियों ने कहा कि गर्भ से ही स्वाद एवं सुगंध के प्रति शिशु की आदतें बनने लगती हैं। जन्म के बाद उसी अनुरूप खाने की चीजों में उसकी रुचि बनती है। विज्ञानियों ने कहा कि स्वाद और सुगंध के मेल से ही किसी खाद्य पदार्थ का फ्लेवर तय होता है। गर्भ में पल रहा शिशु इन दोनों ही भावों को समझने में सक्षम होता है। ब्रिटेन की डरम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मां के भोजन पर शिशु की प्रतिक्रिया को लेकर अध्ययन किया। इसके तहत 100 गर्भवती महिलाओं की 4डी अल्ट्रासाउंड स्कैनिग के माध्यम से विज्ञानियों ने गर्भस्थ शिशु के चेहरे के भावों का विश्लेषण किया। शोध के दौरान जब मां को गाजर जैसा कुछ मीठा खाने को दिया गया, तब शिशु के चेहरे पर खुशी के भाव दिखे। दूसरी ओर तेज और तीखे स्वाद की स्थिति में शिशु के चेहरे के भाव कुछ रोने वाले रहे।

गर्भ में ही शिशु देते हैं स्वाद और सुगंध पर प्रतिक्रिया

हमने घर के बुजुर्गों से सुना है कि गर्भवती महिला के भोजन और खाने-पीने की आदतों से बच्चे की आदतें निर्धारित होती हैं। गर्भावस्था के दौरान अच्छी और स्वादिष्ट लगने वाली चीजें खाने की सलाह भी दी जाती है। अब विज्ञानियों ने इस बात का प्रमाण जुटाया है कि गर्भ में ही शिशु स्वाद और सुगंध पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं। शोध को विज्ञान पत्रिका साइकोलाजिकल साइंस में प्रकाशित किया गया है।

इसलिए अहम है यह शोध

शोध का परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से लोगों में स्वस्थ खानपान की आदत को लेकर जागरूकता फैलाने में मदद मिलेगी। गर्भावस्था के दौरान अच्छे एवं स्वास्थ्यपूर्ण भोजन को बढ़ावा देकर बच्चे में जन्म से ही ऐसे खा ्‌य पदार्थों के प्रति रुचि पैदा करना संभव हो सकेगा।

Posted By: Navodit Saktawat

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