ताजा शोध के मुताबिक कोविड-19 के मरीज में खून के थक्के (ब्लड क्लाटिंग) होने का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर खून के थक्के के कारण ही कोरोना संक्रमण के मरीजों को हृदय संबंधी गंभीर रोगों का सामना करना पड़ता है। क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों के अनुसार कोविड के मरीजों में खून के थक्के बनने की परेशानी ज्वलनशीलता (इनफ्लेमेशन) से होती है। यह ज्वलनशीलता वायुमार्ग की संक्रमित कोशिकाओं के कारण होती है। इस संक्रमण का कारण रक्तवाहिनी नहीं होती जैसे पहले समझा जाता था। वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान वाहिकी संबंधी रोग (वैस्कुलर डिजीज) होने की वजह रक्त वाहिनी में वायरल संक्रमण होना नहीं है। चूंकि कोविड-19 (सार्स-को-वि-2) वायरस के कारण शरीर की रक्तवाहिनी में संक्रमण नहीं होता है। नए शोध में कोरोना वायरस का इस्तेमाल किया गया और कोरोना के प्रोटीन युक्त स्पाइक्स का नहीं, इसलिए वह पूरे यकीन से कह सकती हैं कि रक्तवाहिनियों पर कोरोना के संक्रमण का असर नहीं होता है।

हृदय की नलिकाओं पर गहरा असर

"क्लीनिकल एंड ट्रांसलेशनल इम्यूनोलाजी" में प्रकाशित इस शोध से वायरस और रक्तवाहिनी के बीच के संबंधों का स्पष्ट स्वरूप पता चलता है। माइक्रोस्कोपी सुविधाओं के जरिये शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि वायरस कोशिकाओं में कहां विचरण करता है और रक्तवाहिनी किसतरह से जीवित वायरस के प्रति अपनी प्रतिक्रिया देती है। इम्यूनोलाजिस्ट लारिसा लाबजिन के अनुसार शरीर में जलन का हृदय की नलिकाओं पर गहरा असर पड़ता है। चूंकि यह मिलकर इस संक्रमण के खिलाफ काम करती हैं। रक्त के जरिये प्रतिरोधक कोशिकाएं (इम्यून सेल) को संक्रमण के स्थान पर भेजा जाता है। और रक्त वाहिनी के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में रक्त के थक्के बनने लगते हैं। अगर हमारी प्रतिरोधक क्षमता ठीक तरह से काम कर रही होती है तो वह हमारे शरीर से वायरस को पूरी तरह से साफ कर देती है।

Posted By: Navodit Saktawat