Skin problems in Winter: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। ठंड के मौसम में त्वचा में रुखापन आ जाता है। जिसके चलते शरीर पर पपड़ी जमा हो जाती है जिससे चकत्ते बनते हैं। जब इन चकत्तों में खुजली होती है तो उससे संक्रमण फैलता है और उस चकत्ते से पानी व मवाद आने लगता है। असल में ठंड के मौसम में लोग समय पर नहाते नहीं और अनधुले कपड़े लंबे समय तक पहनते रहते हैं। जिससे त्वचा में आयल की कमी आती है और रुखी हो जाती है। यदि त्वचा की सफाई होते रहे और उसे रुखा होने से बचाने के लिए आयल या क्रीम आदि लगाई जाए तो त्वचा में रुखापन नहीं आता है।

ठंड में ह्दय,ब्रेन हेमरेज व मौसमी बीमारियों के साथ में त्वचा रोग भी तेजी बढ़ा है। इन दिनों ह्दयरोग, न्यूरोलाजी और मेडिसिन के बाद सबसे अधिक मरीज त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। त्वचारोग विभाग की ओपीडी में सबसे अधिक एग्जिमा रोग के मरीज पहुंच रहे हैं। त्वारोग विशेषा डा अनुभव गर्ग ने बताया कि ठंड में त्वचा का रुखापन इस बीमारी को बढ़ावा देता है। त्वचारोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 20 फीसद मरीज एग्जिमा की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। यह समस्या बच्चों व बुजुर्गों में अधिक देखी गई है। बच्चों में सर्दी,जुकाम और बुखार की शिकायत भी तेजी से बढ़ी है। एक साल से कम उम्र के बच्चे ब्रोंकियोलाइटिस की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिन्हें भर्ती कर उपचार देना पड़ रहा है।

पीडियाट्रिक डा अजय गौर का कहना है कि इन दिनों सबसे अधिक ब्रोंकियोलाइटिस की शिकायत लेकर बच्चे आ रहे हैं। यह शिकायत एक साल तक के बच्चों में अधिक देखी गई है। इस बीमारी को बच्चों की पसली चलना भी बोलते हैं। बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज तक देना पड़ रहा है। असल में ठंड के कारण सर्दी,खांसी, जुकाम की शिकायत वायरस के कारण होती है। जिससे बच्चों की सांस नली में कफ जमा हो जाता है। सांस लेने में परेशानी होती है तो बच्चे की बेचैनी बढ़ जाती है और बच्चे लगातार रोने लगते हैं। क्योंकि बच्चे खांसना भी नहीं जानते और मुंह से सांस लेना भी नहीं आता। इसलिए कफ बाहर भी नहीं निकलता। ऐसे में बच्चों को भर्ती करने की आवश्यकता पड़ती है। इंजेक्शन व दवा के माध्यम से सांस नली से कफ को हटाने का काम किया जाता है।

Posted By: anil tomar

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