Asthma Triggers: सांस संबंधी यह तकलीफ किसी को भी परेशान कर सकती है। इस पर नियंत्रण के लिए सही प्रबंधन बहुत जरूरी होता है। ट्रिगर्स का ध्यान रखना बहुत फायदेमंद हो सकता है। खासकर बच्चों के मामले में।

एलर्जी का आक्रमण एलर्जिक अस्थमा से पीड़ित बच्चों में कई बार अचानक लक्षण एकदम से उभरने लगते हैं। उसे खांसी, छींकें और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। यदि वह स्कूल में होता है तो घबरा उठता है कि ऐसा क्यों और कैसे हो गया। केवल घर के बाहर ही नहीं आज के प्रदूषित वातावरण में घर के अंदर भी कई सारी चीजें ऐसी हैं जो आपके बच्चों में एलर्जिक अस्थमा के लक्षणों को भड़का सकती हैं। इसलिए सबसे जरूरी है ट्रिगर्स को पहचनाना और बच्चों को भी इनके बारे में समझाना, ताकि वे खुद भी अपना बचाव कर सके।

सिखाएं पहचान करना

सबसे पहले बच्चों में लक्षण दिखाई देते ही आप खुद इस बात को नोट करना शुरू करें कि उसके आसपास क्या चीजें हैं, क्या माहौल है, उसने क्या खाया या पीया या क्या मौसम में कोई परिवर्तन हुआ है, आदि। मौसम में बदलाव, घर में बिस्तर, कालीन, कपड़ों, सॉफ्ट टॉयज आदि चीजों में बैठी नमी, किसी ठंडी चीज (आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक या ठंडे पानी) का सेवन, हवा या धूल में मौजूद बहुत सूक्ष्म कण, कॉकरोच, घर में मौजूद पालतू पशुओं केफर या बाल जैसी कई चीजें हैं जो ट्रिगर का काम कर सकती हैं। इन ट्रिगर्स को याद रखें और बच्चों को इनसे बचना सिखाएं।

घबराना नहीं लड़ना सिखाएं

बच्चों के मन में ट्रिगर्स को लेकर डर या घबराहट न बैठाएं। बल्कि उन्हें इनसे बचना, इम्युनिटी को मजबूत बनाने के लिए पौष्टिक खान-पान, व्यायाम (डीप ब्रीदिंग, बलून फुलाने जैसे व्यायाम) को अपनाना और यदि डॉक्टर ने इन्हेलर के उपयोग के लिए कहा है तो उसका उपयोग करना बच्चों को सिखाएं। इससे बच्चा अचानक आई मुश्किल में भी समस्या पर नियंत्रण करना सीख जाएगा।

Posted By: Arvind Dubey