World Heart Day: हर साल करीब 17 मिलियन यानी 1.7 करोड़ लोगों की मौत हृदय से जुड़ी बीमारी के चलते हो रही है। लगभग 80-82 फीसदी कार्डियक अरेस्ट अस्पताल के बाहर होता है। ऐसी स्थिति गंभीर होती है और हर मिनट की देरी पर जान बचने की संभावना 7-10 फीसदी कम हो जाती है। कुछ देशों में सीपीआर के बढ़ते चलन से यह पाया गया है कि 40-60 फीसदी लोगों को कार्डियक अरेस्ट के बाद बचाया जा सकता है। भारत की बात करें तो यहां 2 फीसदी से भी कम आबादी को सीपीआर में प्रशिक्षित किया जाता है, जबकि 30 फीसदी को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। भारत की प्रमुख निजी गैर-जीवन बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने अपने नए डिजिटल अभियान #LearnCPRSaveALife के आधार के रूप में इस गंभीर वास्तविकता को उठाया है। अभियान का उद्देश्य सीपीआर के बारे में भ्रांतियों को दूर करना और इस बेसिक लाइफ स्किल यानी बुनियादी जीवन कौशल के बारे में जागरूकता पैदा करना है।

5-10 मिनट के अभ्यास से सीख सकते हैं सीपीआर

अलग अलग रिपोर्ट से पता चलता है कि कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) - एक जीवन रक्षक तकनीक है, जिसका उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति को बचाने के लिए किया जाता है जिसकी सांस या दिल की धड़कन रुक गई है। यह तरीका 5-10 मिनट के अभ्यास से सीखा जा सकता है और यह किसी के जीवन को बचाने में काम आ सकता है। फिर भी, 98 फीसदी भारतीय इस तकनीक से अनजान हैं। गलत धारणाओं के कारण सीपीआर के प्रति उदासीनता ज्यादा है, जिस वजह से बहुत से लोग इसे सीखने की कोशिश नहीं करते हैं या पर्याप्त रूप से आश्वस्त होने का प्रयास नहीं करते हैं।

भारत में तेजी से बढ़ रही हैं हृदय से जुड़ी बीमारियां

इस कैंपेन के मौके पर आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की हेड-मार्केटिंग, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन एंड सीएसआर, शीना कपूर ने कहा कि आज के समय में, हृदय से जुड़ी बीमारियां और मौतें खतरनाक दर से बढ़ रही हैं। कई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक भारत में हृदय से जुड़ी बीमारियों के चलते सबसे ज्यादा मौतें होंगी। दिल का दौरा पड़ने के अधिकांश मामलों में इसे पहचानने और उन महत्वपूर्ण सेकंडों में सीपीआर करने में देरी के कारण सर्वाइवल रेट बिगड़ रहा है.

सीपीआर के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी

उनका कहना है कि भारत में एक छोटी सी ही आबादी सीपीआर तकनीक को जानती या समझती है क्‍योंकि माउथ टु माउथ किस के चलते बहुत से लोग इसे पूरी तरह से गलत समझते हैं. इसी वजह से हमने इस अभियान को शुरू किया है. अधिकांश फिल्मों में सीपीआर के दृश्यों को दिखाया गया है, लेकिन इससे भी खास मदद नहीं मिली है. और वास्तव में, इसकी स्थापना के विरोध में रोमांस में स्थापित होने की झूठी तस्वीर को कायम रखा है।

एक प्रमुख प्राइवेट जनरल इंश्योरर यानी सामान्य बीमाकर्ता के रूप में, हम सीपीआर के तरीके सीखने और इसकी आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डालना चाहते थे। हमें खुशी है कि इमरान हाशमी इसके लिए मुख्य नायक की भूमिका निभा रहे हैं, जिससे यह अभियान और इसे लेकर संदेश मजबूती से लोगों तक पहुंचा है। हम मानते हैं कि वह सीपीआर से जुड़े मिथकों को दूर करने और जरूरत के महत्वपूर्ण समय में किसी को बचाने की क्षमता पर जोर देने के लिए सही तरह से फिट हैं। सीपीआर एक किस नहीं बल्कि एक किस ऑफ लाइफ है।

अधिक जागरूकता की आवश्यकता

अभिनेता और बॉलीवुड सेलिब्रिटी इमरान हाशमी ने इस मौके पर कहा कि जब मैंने सीपीआर के बारे में लोगों की सामान्य भ्रांतियों के बारे में सुना तो हैरानी हुई। हमें इस मोर्चे पर अधिक जागरूकता की आवश्यकता है क्योंकि यह जीवन से संबंधित है और यह एक जीवन रक्षक तकनीक है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के साथ साझेदारी करके, सीपीआर के बारे में शायद सबसे बड़े मिथक को खत्म करने के लिए देश को शिक्षित करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

सीपीआर को लेकर दूर हो भ्रांतियां

उन्होंने कहा कि यह किसी भी तरह से चुंबन या रोमांटिक हाव भाव नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक तकनीक है। मेरा मानना है कि एक और जीवन को बचाने की प्रवृत्ति स्वाभाविक रूप से आनी चाहिए हम सभी को इस बारे में जानकारी होनी जरूरी है। इस इनोवेटिव कैंपेन के साथ लोगों की सोच में बदलाव लाना है और लोगों को खुद को और अपने आसपास के लोगों को जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के बारे में शिक्षित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

हेल्थ एंड वेलनेस का हमेशा ध्यान

डिजिटल फिल्म को विश्व हृदय दिवस पर सभी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के स्वामित्व वाले और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया जाएगा। कंपनी हमेशा से ही हेल्थ एंड वेलनेस की समर्थक रही है और लोगों को सही स्वास्थ्य आदतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने और जागरूकता पैदा करने के लिए अपनी रिसर्च और बॉन्‍ड कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया है। इसने हाल ही में अपना 'वेलनेस इंडिया इंडेक्स - 2022' रिसर्च जारी किया है, जो भारत में वेलनेस के विविध क्षेत्रों में अभूतपूर्व रुझानों और कंज्यूमर के व्यवहार को जानने के लिए एक एनुअल बेंचमार्क के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रव्यापी अध्ययन के अनुसार, भारत का वेलनेस इंडेक्स 100 में से 72 पर है, जो पिछले साल की तुलना में 2 अंक अधिक है। यह दर्शाता है कि भारत अपने वेलनेस रडार पर वापस ट्रैक पर है।

Posted By: Navodit Saktawat

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