पणजी। गोवा में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। यहां दस विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं। गोवा विधानसभा में कांग्रेस के दो तिहाई विधायक अलग गुट बनाकर BJP में शामिल हो गए हैं। अब 40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 27 हो गई है।

गोवा विधानसभा में यह BJP की अब तक की सबसे अधिक संख्या है। बुधवार शाम 7.30 बजे गोवा विधानसभा में नेता विरोधीदल चंद्रकांत बाबू कावलेकर के नेतृत्व में 10 विधायकों का समूह विधानसभा अध्यक्ष राजेश पाटनेकर के पास पहुंचा।

वहां CM डॉ. प्रमोद सावंत और विधानसभा उपाध्यक्ष माइकल लोबो भी उपस्थित थे। पत्रकारों से बात करते हुए चंद्रकांत कावलेकर ने कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र में लोगों के बीच जाना है। लेकिन विकास नहीं हो पा रहा है।

कांग्रेस विधानसभा चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, लेकिन उस समय और उसके बाद भी अवसर मिलने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्य में सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सके। कांग्रेस के 10 विधायकों ने अलग गुट बनाकर भाजपा में शामिल होने का निर्णय किया।

गोवा के सीएम प्रमोद सावंत ने बताया कि कांग्रेस के 10 विधायक, अपने विपक्षी नेताओं के साथ, भाजपा में शामिल हो गए हैं। वे राज्य और अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए आए थे। उन्होंने कोई शर्त नहीं रखी है, वे बिना शर्त भाजपा में शामिल हुए हैं। इस तरह सदन में भाजपा की ताकत अब बढ़कर 27 हो गई है।

गोवा के डिप्टी स्पीकर माइकल लोबो ने कहा कि कांग्रेस के 10 विधायकों ने संविधान की अनुसूची 10 के तहत विलय किया है। बाबू कावलेकर (चंद्रकांत कावलेकर) के नेतृत्व में 10 विधायक जो पहले विपक्ष के नेता थे, विलय हो गए।

भाजपा के साथ विलय के बाद चंद्रकांत कावलेकर ने कहा कि, हम में से 10 ने आज भाजपा में प्रवेश किया, सिर्फ इसलिए कि CM अच्छा काम कर रहे हैं। मैं विपक्ष का नेता था, इसके बावजूद हमारे निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य नहीं हो सका। एकल सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद हम सरकार नहीं बना सके।

चंद्रकांत कावलेकर ने यह भी कहा कि, अगर कोई विकास नहीं हुआ, तो लोग अगली बार हमें कैसे चुनेंगे? वे (कांग्रेस) अपने किए गए वादों को पूरा नहीं कर सके। सरकार बनाने के कई अवसर थे लेकिन कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच एकता की कमी के कारण ऐसा कभी नहीं किया जा सका। इसलिए हमने ऐसा किया।

गोवा में भाजपा पहली बार इतनी मजबूत

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 14 और कांग्रेस को 17 सीटें मिली थीं। लेकिन सबसे बड़ा दल होने के बावजूद वहां कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकी। विधानसभा चुनाव के कुछ दिनों बाद ही कांग्रेस के तीन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था।

पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर के निधन से उनकी पणजी सीट भी खाली हुई थी। इन चारों सीटों पर लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव हुए थे। इनमें से तीन सीटें BJP ने और एक सीट कांग्रेस ने जीती। सदन में BJP की संख्या 17 और कांग्रेस की 15 हो गई थी।

BJP सरकार को तीन निर्दलीय और तीन अन्य दल के विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। अब कांग्रेस के 10 विधायकों के BJP में शामिल हो जाने से सदन में प्रमोद सावंत सरकार के पक्ष में 33 विधायक होंगे जो अब तक राज्य में भाजपा की सबसे मजबूत स्थिति होगी।