नई दिल्ली। मेट्रो के लिए मुंबई की मशहूर आरे कॉलोनी में शुक्रवार रात से शुरू हुई पेड़ो की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। सर्वोच्च न्यायालय ने आरे कॉलोनी में जारी पेड़ों की कटाई तत्काल रोकने के आदेश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों को भी तुरंत रिहा करने के निर्देश दिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए एक विशेष बेंच का गठन किया था जिसने मंगलवार को पेड़ों की कटाई पर सुनवाई की। आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई के खिलाफ रिषभ रंजन नामक एक व्यक्ति ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को खत लिखा था और उसी के आधार पर कोर्ट ने इस विशेष पीठ का गठन किया था।

सुनवाई शुरू होते ही सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से जस्टिस अरुण मिश्रा ने पूछा कि हमें बताईए यह ईको सेंसिटिव झोन है या नहीं? हमें जो कागजात मिले हैं उसमें यह एक ईको सेंसिटिव झोन नहीं बल्कि नो डेवलपमेंट झोन है।

इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायलय ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वो पेड़ों की कटाई ना करे। इसके बाद सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अब कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा।

इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि जिन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है उन्हें रिहा किया जाए। अगर रिहाई में कोई बचे हैं तो तुरंत छोड़ा जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी इस केस में पार्टी बनाने के लिए आदेश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायलय ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले रविवार को ही वंचित बहुजन आघाड़ी पार्टी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर कटाई का विरोध करने पहुंचे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें कॉलोनी में घुसने से पहले ही हिरासत में ले लिया था। हालांकि, उन्हें कुछ देर बाद रिहा कर दिया गया था लेकिन आंबेडकर ने सरकार पर अपनी ताकत के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी सरकार में न भी आए तो भी वह आरे के पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन करती रहेगी।

बता दें कि आरे कॉलोनी में मेट्रो का पार्किंग शेड बनाने के मामले में 29 अगस्त को बीएमसी वृक्ष प्राधिकरण ने सरकार के पक्ष में फैसला देते हुए पेड़ों की कटाई की अनुमति दी थी। फैसले में 2185 पेड़ काटने और 400 से ज्यादा पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने के लिए कहा गया था।

इस फैसले के विरोध में 16 सितंबर को पर्यावरणप्रेमियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन, शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मामला पहले ही एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय में है ऐसे में हाईकोर्ट इसमें फैसला नहीं दे सकती। हाईकोर्ट का यह फैसला आते ही अधिकारियों ने तत्काल पेड़ों की कटाई शुरू कर दी।

Posted By: Ajay Barve