मुंबई। 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाया गया था। अब महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि उस दौरान जेल भेजे जाने वाले सभी लोगों को पेंशन दी जाएगी। साथ ही उन्हें सरकार प्रशंसा-पत्र देगी। सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह घोषणा की और बताया कि आपातकाल का विरोध करने पर 1 माह तक जेल में रहने वालों को 5000 रुपये तथा इससे ज्यादा समय तक रहने वालों को 10,000 रुपये हर माह पेंशन मिलेगी। जिनका निधन हो चुका है, उनके परिजन को ढाई हजार और पांच हजार रुपये प्रति माह पेंशन दी जाएगी। पेंशन के लिए 42 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की गई है। इनमें 28-29 करोड़ रुपये का वितरण भी किया जा चुका है।

मंगलवार को इस मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानसभा में चर्चा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि, 'यह पेंशन पैसे से ज्यादा उन लोगों का सम्मान है, जिन्होंने आपातकाल का विरोध करते हुए जेल में यातनाएं झेलीं।' इससे पहले NCP नेता अजित पवार के सवाल का जवाब देते हुए राज्यमंत्री मदन येरावर ने बताया, अब तक आपातकाल के समय जेल जाने वालों के 3,267 आवेदन मंजूर किए गए हैं। इनमें 1,179 आवेदक ऐसे हैं, जिन्होंने 100 रुपये के स्टांप पेपर पर लिखकर दिया है कि आपातकाल के दौरान उन्हें जेल की सजा हुई थी।

इस पर पवार ने पूछा कि यह कैसे साबित होगा कि स्टांप पेपर पर लिखकर देने वाले सही कह रहे हैं। इस पर येरावर ने जवाब दिया कि इन्हें जांच के बाद जिलाधिकारियों ने मंजूर किया है।

Posted By: Arvind Dubey

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