ओमप्रकाश तिवारी, पणजी (गोवा)। गोवा की नवगठित भाजपानीत सरकार का शक्ति परीक्षण बुधवार को होगा। राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने सुबह 11.30 बजे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के अनुसार, उन्हें 21 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।

जबकि इस समय 40 सदस्यों वाली विधानसभा में विधायकों की संख्या 36 है। मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर के निधन के बाद करीब 30 घंटे चली विधायकों की मान-मनौव्वल के बाद गोवा में नई सरकार के गठन का रास्ता संभव हो सका था।

लिहाजा, सोमवार-मंगलवार रात करीब 1.50 बजे राज्यपाल ने डॉ. प्रमोद सावंत को मुख्यमंत्री, सुदिन धवलीकर और विजय सरदेसाई को उपमुख्यमंत्री, नौ विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलवाई। ये सभी पर्रीकर के मंत्रिमंडल में भी शामिल थे।

पर्रीकर के निधन के बाद रविवार देर रात गोवा पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आते ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर विभिन्न घटकों से चर्चा शुरू कर दी थी।

पर्रीकर के नेतृत्व वाली सरकार को महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के साथ-साथ तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त था। एमजीपी और पीएफपी दोनों ने दो वर्ष पहले हुए चुनाव के समय इसी शर्त पर भाजपानीत सरकार को समर्थन देना मान्य किया था कि मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर हों।

तब रक्षा मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से मुक्त कर पर्रीकर को गोवा लाया गया था। पर्रीकर पहले भी तीन बार गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके थे। उनके निधन के बाद भाजपा को किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो सभी सहयोगी दलों को मान्य हो।

भाजपा में भी थे प्रतिद्वंद्वी

पार्टी नेतृत्व ने विधानसभा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. प्रमोद सावंत का नाम आगे बढ़ाने का विचार किया। लेकिन सहयोगी दलों की कौन कहे, भाजपा में ही उनके प्रतिद्वंद्वी तैयार थे। युवा विधायक विश्वजीत राणे अपना दावा लेकर तैयार खड़े थे। विधानसभा उपाध्यक्ष मिशेल लोबो उनके नाम का समर्थन कर रहे थे।

राणे को कुछ और विधायकों का भी समर्थन प्राप्त था। पार्टी को आशंका थी कि पार्टी में मनोहर पर्रीकर के समकक्ष रहे केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक भी मुख्यमंत्री पद की इच्छा न जता दें। वह सबसे प्रबल दावेदार हो सकते थे। लेकिन उत्तरी गोवा संसदीय सीट से अपनी जीत पक्की मान रहे श्रीपद नाइक ने दावेदारी की ही नहीं।

गडकरी ने अंत्येष्टि से पहले बयान दिया था कि शाम छह बजे तक सरकार गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन सोमवार शाम आठ बजे तक ही भाजपा की ओर से डॉ. प्रमोद सावंत को मुख्यमंत्री बनाना तय हो पाया। अब बारी थी सहयोगी दलों को मनाने की।

सरदेसाई ने निर्दलीयों को जोड़ लिया था साथ

गोवा फारवर्ड पार्टी के तेजतर्रार नेता विजय सरदेसाई ने भी अपने दो विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर जी-6 समूह बना लिया था। यह समूह विजय सरदेसाई को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहता था। जीएफपी के तीनों विधायक पर्रीकर सरकार में भी मंत्री थे।

इस बार जीएफपी के नेता विजय सरदेसाई अपने लिए उपमुख्यमंत्री पद और अन्य दो विधायकों के लिए मंत्री पद की मांग पर अड़े थे। भाजपा नेतृत्व ने सरदेसाई की यह मांग मान ली।

धवलीकर बनना चाहते थे मुख्यमंत्री

एमजीपी के नेता और पांच बार के विधायक सुदिन रामकृष्ण धवलीकर भी मैदान में उतर चुके थे। पिछली सरकार में एमजीपी के दो विधायक मंत्री थे। इस बार एमजीपी के नेता सुदिन धवलीकर स्वयं मुख्यमंत्री पद का दावा कर रहे थे। उनकी यह मांग न माने जाने पर वह डोना पावला रिसॉर्ट में चल रही बैठक में नहीं आए।

एमजीपी विधायकों ने साथ छोड़ा तो टूटे धवलीकर धवलीकर पर दबाव बनाने के लिए गडकरी और अमित शाह ने एमजीपी के दोनों विधायकों बाबू अजगांवकर और दीपक पाउस्कर को मंत्री बनाने का प्रस्ताव देकर उनका समर्थन हासिल कर लिया और सभी विधायकों को लेकर राजभवन की ओर रवाना हो गए।

अब सुदिन धवलीकर के सामने उनकी पार्टी टूटने का खतरा पैदा हो गया था। उनके हाथ कुछ नहीं आ रहा था और उनके दोनों विधायक भाजपा के साथ जाने को तैयार खड़े थे। लिहाजा रात करीब 12 बजे वह हड़बड़ाकर राजभवन में घुसते दिखाई दिए। पत्रकारों के पूछने पर इतना ही बोले कि गडकरी जी ने बुलाया है, इसलिए आया हूं।

सुदिन के आने के बाद राजभवन में बातचीत का एक दौर और शुरू हुआ। जिसमें करीब 1.40 बजे सुदिन को उपमुख्यमंत्री पद और उनके एक विधायक को मंत्री पद देने की बात पर सहमति बनी। इसके बाद ही सरकार का शपथ ग्रहण हो सका।

गोवा विस की दलीय स्थिति कुल सीटें : 40 रिक्त सीटें : 04 बहुमत : 19 भाजपा+ : 21 (भाजपा 12, जीएफपी 3, एमजीपी 3, निर्दलीय 3) कांग्रेस : 14 राकांपा : 01