Mumbai News: कहते हैं कि स्कूल की पाठशाला से कहीं ज्यादा जिंदगी की पाठशाला में सबक सीखने को मिलता है। महाराष्ट्र के मुंबई में एक अनपढ़ ड्राइवर लोगों को कुछ ऐसा ही सबक सिखा गया जिसे लोग ताउम्र याद रखेंगे। दरअसल 65 साल के राजकुमार झा की इच्छा थी कि मरने के बाद उनके अंगों को दान किया जाए। हाल ही में नानावती अस्पताल में भर्ती राजकुमार को डॉक्टर्स ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक परिवार ने उनके अंगों को दान कर दिया। इससे तीन लोगों की जिंदगी बच सकी। इतना ही नहीं झा के इस कदम से लोगों को अंगदान का महत्व भी समझ आया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजकुमार झा का परिवार दरभंगा से आया था। उनकी इच्छा के मुताबिक परिवार ने उनकी किड़नियों और लीवर को दान कियाा। उनकी कि़डनियां नानावटी हॉस्पिटल और जसलोक अस्पताल में भर्ती मरीजों को दी गईं। वहीं लीवर ग्लोबल अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती एक महिला को डोनेट किया गया।

राजकुमार झा हाल ही में दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इसकी जानकारी जब उनकी पत्नी और बेटे को लगी तो मुंबई पहुंचे। इसके बाद उनकी पत्नी ने रिश्तेदारों से चर्चा करने के बाद उनके अंगों को दान करने का फैसला किया। नानावती अस्पताल से सामने आई जानकारी के मुताबिक 'झा को जब अस्पताल लाया गया उस वक्त वे अचेत अवस्था में थे। उनके सिर के बाईं ओर से खून बह रहा था। उनकी नाक और कान से भी खून निकल रहा था। वे इलाज के दौरान भी एक बार भी होश में नहीं आए। उनका इलाज कर रही डॉक्टर्स की टीम ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया।'

पोस्टमार्टम के बाद अस्पताल ने राजकुमार झा के शव को परिजनों को सौंप दिया। मुंबई में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद परिवार दरभंगा लौट गया।

Posted By: Neeraj Vyas

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